Monday, June 29, 2015

ऐसा था... मेरा प्यार!

मेरे हाथ कभी तेरे गेसुओं से नीचे फिसले नहीं..
आंसू कभी तेरी चुनरी से नीचे लुढके नहीं...
और
जज्बात कभी तुझसे मिल बहके नहीं..
ऐसा था मेरा प्यार!

थोड़ा सा सहमा सा घबराया हुआ..
थोड़ा सा कस्बाई संस्कृति से जकड़ा हुआ.. थोड़ा गंवई या backward कह लो... और
थोड़ा सा गंभीर या भावुकता से ओतप्रोत..
ऐसा था मेरा प्यार!

थोड़ा सा पावन और पवित्र..
थोड़ा सा शाश्वत और निश्छल.. और थोड़ा सा
लोक लाज लज्जा सा बंधा  हुआ... सकुचाया सकुचाया  सा.. घबराता सा.. a bit nervous सा..
ऐसा था मेरा प्यार!

थोड़ा सा Black & White वाला..
थोड़ा सा -Archies Greetings Cards वाला.. और
थोड़ा सा चिट्ठी-पत्रि वाला..
थोड़ा सा मेले या मंदिरों में मिलने मिलाने वाला... और
थोड़ा सा -मन चाही मोहब्बत पाने की धुन में -सोमवार का शंकर जी का व्रत करने वाला...
सच्ची ऐसा था -मेरा प्यार!

थोड़ी सा...
चूड़ी बिंदी या रूमाल खरीदकर तुम्हें कभी मौका देख.. प्यार से देने वाला....
तुम्हारा नाम अपने नाम से जोड़ कर किताब में लिखने वाला..
थोड़ा सा कभी कभी तुम्हारा जूंठा खाने वाला चुपके से... और
हाँ कभी कभी तुम्हारा हाथ अपने हाथ में लेने वाला..
ऐसा था -मेरा प्यार!

कभी रोने वाला..
कभी बिछड़ने वाला..
कभी मरने वाला तो कभी भूल जाने वाला..
सच्ची..
ऐसा था -मेरा प्यार!

और आज २०१५-में -अपने प्यार को सोच कर चुपचाप मुस्कुराने वाला..
facebook पर तुम्हारे बच्चों में तुम्हारी छवि तलाशने वाला..
वादों वादियों और यादों को ज़िंदा दफ़न करने की कोशिश करता... हुआ
ऐसा है मेरा प्यार! 

अल्फाज़ों में क्या बयाँ करे अपनी मोहब्बत के अफसानें,हमारे दिल में तो वो ही वो है, उनके दिल की खुदाजाने...

(गौरव!)

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