उस अलसाई भोर को सलाम जिसने ज़िन्दगी में आशा दी...
उन दोपहरियों को सलाम जिन्होंने ज़िन्दगी में धुप-छाओं,लपट-आंधी और पसीने से तर-बतर कर जीना सिखाया और....
उन हसीं शामों को दिल से सलाम जिन्होंने -
डूबते हुए सूरज...
घोंसले में लौटते पंछी...
मंदिरों की शाम की आरती की घंटी...
और मोहब्बत में पाकीजगी का दीदार कराया!
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