Thursday, May 3, 2018

किसान की अरदास !

"तुम फरमाते रहो ..
कहानियां अपनी सफलता की ..
मुझे दो रोटी कमाने घर से निकलना है !

तुम सुनाते रहो ...
शोखियाँ मोहब्बतों की ...
मुझे दो रोटी कमाने घर से निकलना है !

तुम बताते रहो ..
बातें देश बदलने की ..
मुझे दो रोटी कमाने घर से निकलना है !

कभी मन करे तो ...
मेरे साथ खेत पे चलना !
दो रोटी कमाने का हुनर ..
तुम्हें भी सिखा दूंगा !! "

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