Friday, February 16, 2018

मोहताज़!

हर रात अकेला हो जाता हूँ ; ऐ चाँद !!
तेरी तरह ..सैकड़ो तारों के बीच !
अपने वज़ूद की तलाश में ;
सोचते सोचते ..

पता है ..मुझे यह अच्छे से !
निज रौशनी से ही प्रकाशित हूँ ; मैं !
वरना मैं भी ..तेरी तरह ..
तारों के रोशन होने का मोहताज़ नहीं !

शुभ रात्रि !
[गौरव !]

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