मैं वक़्त हूँ !
"मुझे मोतीलाल-जवाहर मिले
फिर इंदिरा मिली !
फ़ीरोज़ भी दिखे !
फिर संजय-राजीव मिले!
मेनका वरुण भी दृष्टव्य हो जाते हैं!
अब राहुल के साथ ... चहलक़दमियों में व्यस्त हूँ ! रॉबर्ट-प्रियंका से भी मुलाक़ात हो चुकी है !
देखो अगर वह शादी कर लेगा तो आगे के लोगों से भी मुलाकतें चलतीं रहेंगी वर्ना क्या है ;
बस वक़्त हूँ ...
निकल जाऊँगा आगे ...
बहुत आगे ..
समय की सुर ताल और लय में !
पता है -
खानाबदोश वक़्त कभी रुकता नहीं !
'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Thursday, November 9, 2017
वक़्त की अरदास !
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