Thursday, November 9, 2017

वक़्त की अरदास !

मैं वक़्त हूँ !
"मुझे मोतीलाल-जवाहर मिले
फिर इंदिरा मिली !
फ़ीरोज़ भी दिखे !
फिर संजय-राजीव मिले!
मेनका वरुण भी दृष्टव्य हो जाते हैं!
अब राहुल के साथ ... चहलक़दमियों में व्यस्त हूँ ! रॉबर्ट-प्रियंका से भी मुलाक़ात हो चुकी है !
देखो अगर वह शादी कर लेगा तो आगे के लोगों से भी मुलाकतें चलतीं रहेंगी वर्ना क्या है ;
बस वक़्त हूँ ...
निकल जाऊँगा आगे ...
बहुत आगे ..
समय की सुर ताल और लय में !
पता है -
खानाबदोश वक़्त कभी रुकता नहीं !

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