Thursday, February 2, 2012

मौन का अर्थ

"तुम्हारे मौन का अर्थ मै क्या समझूँ ?
-कि तुम हो पाषाण से भी दो चार डग आगे.....
अरे-
पाषाण मे भी मिलन की चाह होती है !
अटल विश्वास होता है!
 कहे की लाज होती है! 
अगर न हो विश्वास...... 
पलट के देख लो- तिरछी निग़ाहों से; 
आज भी ताज से मुमताज़ की आवाज़ आती है!"

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