खजुराहो!हाल ही मे उत्तर-प्रदेश के बांदा जिले मे बसे मध्य भारत के प्रवेश द्वार- अर्थात 'कालिंजर दुर्ग' को पर्यटन के नक़्शे मे लाने के नाम से तथा खजुराहो को ' दो रात्री का विश्राम एवं पर्यटन स्थल' (Two Night Destination) बनाने के उद्देश्य से इक बड़े पर्यटन समूह ने कालिंजर मे संगोष्टी का आयोजन किया!
उत्तर प्रदेश के इस पर्यटक स्थल पे खजुराहो के कुछ चुनिन्दा ट्रवेल-एजेंटो को ले जाकर यह घुट्टी पिलाई गई कि कालिंजर के विकास से खजुराहो का भी भला होगा और चाय-नाश्ते की इक सुगन्धित पार्टी के बाद मानसिक रूप से विदेशी पर्यटकों को बली का बकरा बनाने के इक छुपे हुए एजेंडे के तहित 'ब्रेन-ड्रेन' होकर सभी विदा हुए!
खजुराहो आज भी अपनी मूल-भूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है!झाँसी और बनारस जैसे उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केन्द्रों से खजुराहो आना कठिन ही नहीं अपितु रोमांचक तथा दुष्कर भी है!अंतर-राष्टीय बाज़ार मे खजुराहो को 'टूरिस्म-उत्पाद' (Tourism Product) बनने मे अभी लम्बा सफ़र तय करना है!खजुराहो को उचित मंच और गंतव्य पहुंचाए बिना अन्य प्रदेशों के पर्यटन स्थलों की बात करना न सिर्फ खजुराहो के साथ बेमानी होगा बल्कि उन विदेशीओं की सुरक्षा तथा सहुलिअत के साथ भी खिलवाड़ होगा जो कालिंजर के नाम से अपनी जान और अपना सर्वस्व जोखिम में डाल देंगे!
हकीकत यह है कि-" भू-माफिया ,खनन-माफिया,शराब माफिया के साथ साथ अब इक पर्यटन माफिया की पौध या फौज भी विकसित हो रही है जो अपने कुछ निहित स्वार्थों के खातिर इन वीरान परन्तु सुरक्षित वास्तु-दुर्गों अथवा बुन्देली विरासत के बुलंद नमूनों को बलि का बकरा बनाना चाहते हैं!"
"वो दिन दूर नहीं जब बुन्देली विरासत के इन बेहतरीन नमूनों के कुछ ठेकेदार या पहरेदार पैदा हो जायेंगे और हमारी विरासत इनकी बपौती बन जायेगी!बड़े ही दंभ और अहं के साथ यह दर्शाएंगे कि खजुराहो और कालिंजर के यह सबसे बड़े हितैषी हैं और इक समझौते के तहत यह विकास की गंगा बहा कर यह 'ग्रास -रूट 'तक अर्थात निचले स्तर तक पर्यटन का लाभ जन-जन तक पहुँचाएंगे!"
उत्तर प्रदेश के इस पर्यटक स्थल पे खजुराहो के कुछ चुनिन्दा ट्रवेल-एजेंटो को ले जाकर यह घुट्टी पिलाई गई कि कालिंजर के विकास से खजुराहो का भी भला होगा और चाय-नाश्ते की इक सुगन्धित पार्टी के बाद मानसिक रूप से विदेशी पर्यटकों को बली का बकरा बनाने के इक छुपे हुए एजेंडे के तहित 'ब्रेन-ड्रेन' होकर सभी विदा हुए!
खजुराहो आज भी अपनी मूल-भूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है!झाँसी और बनारस जैसे उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केन्द्रों से खजुराहो आना कठिन ही नहीं अपितु रोमांचक तथा दुष्कर भी है!अंतर-राष्टीय बाज़ार मे खजुराहो को 'टूरिस्म-उत्पाद' (Tourism Product) बनने मे अभी लम्बा सफ़र तय करना है!खजुराहो को उचित मंच और गंतव्य पहुंचाए बिना अन्य प्रदेशों के पर्यटन स्थलों की बात करना न सिर्फ खजुराहो के साथ बेमानी होगा बल्कि उन विदेशीओं की सुरक्षा तथा सहुलिअत के साथ भी खिलवाड़ होगा जो कालिंजर के नाम से अपनी जान और अपना सर्वस्व जोखिम में डाल देंगे!
हकीकत यह है कि-" भू-माफिया ,खनन-माफिया,शराब माफिया के साथ साथ अब इक पर्यटन माफिया की पौध या फौज भी विकसित हो रही है जो अपने कुछ निहित स्वार्थों के खातिर इन वीरान परन्तु सुरक्षित वास्तु-दुर्गों अथवा बुन्देली विरासत के बुलंद नमूनों को बलि का बकरा बनाना चाहते हैं!"
"वो दिन दूर नहीं जब बुन्देली विरासत के इन बेहतरीन नमूनों के कुछ ठेकेदार या पहरेदार पैदा हो जायेंगे और हमारी विरासत इनकी बपौती बन जायेगी!बड़े ही दंभ और अहं के साथ यह दर्शाएंगे कि खजुराहो और कालिंजर के यह सबसे बड़े हितैषी हैं और इक समझौते के तहत यह विकास की गंगा बहा कर यह 'ग्रास -रूट 'तक अर्थात निचले स्तर तक पर्यटन का लाभ जन-जन तक पहुँचाएंगे!"
- जहाँ इक ओर पूरा देश मध्य प्रदेश के खनन माफिया और रेत माफिया की चर्चा मे व्यस्त और त्रस्त है;कोई भी राज्य सरकार इक नई छुपी हुई माफिया कौम को जन्म नहीं देना चाहेगी!
- बांधवगढ़ एवम पन्ना राष्ट्रीय पार्कों के जंगलों के करीब उग आये ' रेसोर्टों'; द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि तथा लकड़ी भी जांच की विषय वस्तु है!
- बांदा और चित्रकूट के पूर्व दस्यु ग्रस्त इलाके मे तथा अजयगढ़ की दुर्गम घाटियों को पार करते हुए रेत माफिया और शराब माफिया से उसका एंट्री या गुंडा टैक्स चुकाते हुए कौन सा एजेंट अपने बिज़नस और पर्यटक को खतरे मे डाल के कालिंजर दुर्ग के अलोकिक दृश्य का दीदार करवाने की हिम्मत करेगा?
- हर कोई जानना चाहता है कि क्या-खजुराहो अपने विकास के चरम पर पहुंच गया है?
- क्या पन्ना राष्टीय उद्यान ने अपनी स्थापना के मूल-भूत लक्ष्य को प्राप्त कर लीया है?
- चंद्रनगर स्थित राज-गढ़ महल का हश्र क्या हुआ?
- बुन्देली ग्राम बसारी को कैसे उचित मंच मिलेगा ?
- जब खजुराहो और उसके आस-पास स्थित स्थानों को उचित मान-सम्मान नहीं मिला तो फिर कालिंजर को कैसे मिलेगा?
- क्या कभी कोई ऐसी चौपाल लगायगा जहाँ खजुराहो को जोडने वाले रास्तो पे कोई चर्चा करेगा?
- 'खजुराहो डांस फेस्टिवल' की खोती हुई गरिमा के लिए कौन चिंता करेगा?
- पुरातात्विक महत्व की धरोहरों के सामने हो रही अतिक्रमण और निर्माण के लिए कौन जिम्मेदार है?क्या कभी कोई इस बात की चौपाल लगायगा कि यहाँ असली मालिक कौन है-पुरातत्व विभाग?अथवा राजस्व?अथवा नगर-पंचायत? या तीनों का समिल्लित रूप?
- दोस्तों आओ कुछ सृजन करें?
- आओ कुछ नवीन रचें?
- आओ समझें उस छुपे हुए गुप्त एजेंडे को जो दो-चार बार अपने हवाई-जहाज से आने से और कुछ हस्तिओं से हाथ मिलाने से पूरा हो जायगा!
"ये 'चार्टर्ड फ्लीट' से आने वाले लोग जो अपने को पर्यटन का स्वयं-भू ठेकदार बताते है हमें और आपको एकऐसी कौम मानते हैं जिसने अभी सभ्य दुनिया के दर्शन बहुत सीमित अवस्था में कीए हैं!ये सोचते है कि थोड़ी सी इज्ज़त और नाश्ता दे देने से यह बुन्देली मानुष -'जो हुकुम -जो हुकुम' बोलने लगेंगे और कालिंजर मे एक नया फाईव स्टार होटल की नीव तैयार हो जायगी!"
हमारा उद्देश्य कालिंजर के विकास को अवरुद्ध करना नहीं है अपितु खजुराहो को वो मुकाम और मंच दिलाना है जिसका यह नगर वास्तविक हक़दार है!
जो अपने आप को कालिंजर का वास्तविक भागीरथ बताते हैं उनसे पूछना है और उन बड़े-धनाड्य 'बिजनेस मैनो' और 'वुमिनो' तक यह सन्देश देना है कि खजुराहो को अपनी उमंगो और ख्वाइशो के लिए बलि का बकरा मत बनाइये!
खजुराहो अभी अधूरा है .....
खजुराहो अभी अपूर्ण है.......
खजुराहो अभी सूना है......
और खजुराहो को अभी अपने वास्तिविक मंच की तलाश है!
जय हिंद!
जय जय बुंदेलखंड!
जय जय वीर छत्रसाल!
जय जय खजूर-वाटिका-खजुराहो!

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