Wednesday, March 14, 2012

अम्मा- तुमसे प्यारा कौन?

अम्मा मेरी पूज्य प्यारी अम्माजी,रोज सुबह जब उठता हूँ तो आपकी याद मे एक बार मऊरानीपुर जरुर पहुच जाता हूँ!वो चौके या दालान मे बनी जाली की अलमारी और उसमे समाई शुद्ध घी की खुशबु!पूजा घर मे पूजा करते पूज्य दद्दा जी की छवि आज भी आँखों मे बसी हुई है!दद्दाजी कहते थे -'शानू क्या खाना है?जलेबी?जाओ ले आओ-राजू अरे,जलेबी ले आओ-शानू को खाना है'!सच- "कोई लौटा दे मेरे वो बीते हुए दिन-मेरे प्यारे पल-छिन"!
लेकिन अम्मा आपके आशीर्वाद से आपके सभी बच्चे ज़िन्दगी की दौड़ मे बहुत अच्छा कर रहें हैं!सारा परिवार आपकी छाया मे सफलता के नए माएने गढ़ रहें हैं!आपके शानू पे दुःख की बदली आई थी तो पूरे परिवार  ने कवच बन कर उस कठिन समय को निकाला!न हमने माँ जानी और न हमने कभी नानी जानी बस हमने जाना तो अपनी पूज्य प्यारी अम्मा को जाना!माँ का रूप,नानी का प्यार और बुजुर्गों का स्नेह और आशीर्वाद;सभी कुछ आपके पल्लू से हमने पाया!

अम्मा हमारी प्यारी अम्मा-
जीवन की सबसे दुलारी अम्मा!
साँसों से भी न्यारी अम्मा!
आँखों से भी दुलारी अम्मा!


वटवृक्ष की छाया -अम्मा!
कमला और नर्बदा की काया अम्मा!
जिज्जी की छाया -अम्मा!
रामा,सविता,प्रभा और मंजू का साया -अम्मा!
और.....
दोनों सबसे प्यारे दुलारे बेटों की धड़कन-अम्मा!
और..और...और...
हमारे पूरे परिवार की--
आशीर्वादों की झड़ी -अम्मा!
राखी की लड़ी -अम्मा!
जीवन की कड़ी -अम्मा!

सच....
साँसों से बड़ी -अम्मा!
मेरी अम्मा! 
हम सबकी -अम्मा!

शत शत प्रणाम अम्मा!

सदर चरण वंदन सहित-

आपके शानू-आशीष-वंदना-अर्चना
ईशु-ईशा और नन्हा यश!

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