"रावण भी अट्टहास कर रहा था
जब…मेघनाथ ने लक्ष्मण को युद्ध भूमि में मूर्छित किया था।
दुर्योधन ने भी कहकहा लगाया था
जब….
द्रोपदी का दुशाशन ने चीर हरण किया था।
"चाऊ ऍन लाई " मुस्काए थे
जब….
सन 1962 में हमारी धरती को कब्जाने आये थे।
लिट्टे ने भी "चियर्स" कर जाम टकराए थे
जब…
भोले राजीव गाँधी के परखच्चे उडाये थे।
और ........
इंदिरा के हत्यारे भी खिलखिलाए थे-
जब उन्हें मार आये थे।
पर फिर क्या हुआ???
इतिहास गवाह है-
रावण का अंत हुआ।
दुर्योधन शांत हुआ।
चीन के मनसूबे ध्वस्त हुए -देश का विकास हुआ।
और ....
इंदिरा -राजीव की जगह सोनिया -राहुल ने ली।
आगे इसी कड़ी में-
नक्सलवाद भी जुड़ जायेगा।
मानव अधिकारों के इक दिन के 'हीरो-हेरोइने' चाहे जितने तर्क दे ले-
भावी मानवता के लिए उनके मनसूबे हमेशा कुतर्क ही रहेंगे-देख लेना।
असल में-
कांग्रेस-भाजपा से परे भी एक दुनिया है-
जहाँ .......
कोई प्रवक्ता नहीं है या कोई मानव अधिकारों का पैरोकार नहीं है।
उस जहान की उस अदालत में-
देख लेना-
हिसाब होगा-
एक एक हिसाब होगा-
और। .....
नस्लवाद का छोटा भाई -नक्सलवाद-
अपने बड़े भाई की तरह-हारेगा।
देख लेना ........
इतिहास में .......
नक्सलवाद भी वहीँ दर्ज होगा-
जहाँ आज नस्लवाद है।"

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