"ता उम्र अर्ध्य दे कर सूरज को.....
मांगता रहा -ज़िन्दगी में तेज, ओज और प्रकाश....
उसने आंच जलन और चकाचोंध से सराबोर कर दिया ज़िन्दगी को! "
मत माँगा कर दूसरों से भीख में रहमत और ख़ुशी.....
वो सूखी दिलासा दे कर विदा कर देंगे...
यकीं कर अपनी जद्दोजहद पर....
यकीं कर अपने जीवट पर......
याद रख -
वो अकेला ही खड़ा हो गया था ;उस ईश्वर के सामने....
जो धरती पे गंगा उतार कर लाया था! "
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