डा.रूपेंद्र !
(1935 -1995 )
मेरे पापा!
मेरे प्यारे पापा!
"शिद्दत से ढूंढ़ता हूँ आपको
अपने अंदर.....
आपके जाने के इतने साल बाद भी....
आपका बेटा हूँ न!
आपके जाने के इतने साल बाद भी....
आपका बेटा हूँ न!
जब जब कोई नीचा दिखाता है आपका कन्धा आपके बाजू याद आते हैं जहाँ अक्सर मैं चिपक कर सबकुछ भूल जाता था!
जब जब कोई ऊँचा उठाता है, सम्मान और इज़्ज़त देता है और कहता है -डाक्टर रूपेंद्र का बेटा है तो बरबस आँखों के बिनबुलाये आंसू आपको तलाशते हैं कि - काश आप होते!
जब गुस्से में झल्लाता हूँ तो सब कहते हैं कि - गुस्सा पापा पे गया है!
जब कोई चुनौती देता है तो कह देता हूँ कि -मेरी वल्दियत देख लेना ;टूटना मंजूर हैं झुकना नहीं!
और -जब लिखता हूँ.....
बोलता हूँ..... या -किसी के सामने झुक कर पैर छूता हूँ तो सब कहतें हैं कि-अपने पापा पे गया है!
बोलता हूँ..... या -किसी के सामने झुक कर पैर छूता हूँ तो सब कहतें हैं कि-अपने पापा पे गया है!
मेरे प्यारे पापा!
आपके जाने के बीस साल बाद भी.....
रंगीला बन....... रंगा हुआ हूँ …
उन्हीं रंगों में -जो आपने उकेरे थे ;
अपने ' बेटे 'के अंतर्मन में!
आपके जाने के बीस साल बाद भी.....
रंगीला बन....... रंगा हुआ हूँ …
उन्हीं रंगों में -जो आपने उकेरे थे ;
अपने ' बेटे 'के अंतर्मन में!
हर 'पिता ' घबराता है जब बच्चे बड़े होते हैं,
क्यों कि-
यह पाठ तो पापा ने बताया नहीं था....
क्या करें? उस पल..... इस पल....
सच......
आप याद आतें हैं!
क्यों कि-
यह पाठ तो पापा ने बताया नहीं था....
क्या करें? उस पल..... इस पल....
सच......
आप याद आतें हैं!
गिरुं तो आप? टूटूं तो आप?
दुखी तो आप? परेशान तो आप?
दुखी तो आप? परेशान तो आप?
प्यार तो आप! पवित्रता तो आप ?
माँ तो आप! पापा तो आप!
दिलासा तो आप!ख़ुशी तो आप!
माँ तो आप! पापा तो आप!
दिलासा तो आप!ख़ुशी तो आप!
सफलता तो आप! हंसी तो आप!
और सुख तो आप!
मन घबराता है.... आप जो नहीं हो......
बस....
हिम्मत देना की वो कर जाऊँ
जिससे कभी -मैं भी......
आपके जैसा याद किया जाऊँ! "
हिम्मत देना की वो कर जाऊँ
जिससे कभी -मैं भी......
आपके जैसा याद किया जाऊँ! "
परिचय :
"बुंदेलखंड अंचल में पत्रकारता के जनक स्व. डॉक्टर रूपेंद्र खरे ने 1970 के दशक में आज के लवकुशनगर में अपना निजी चिकित्सालय खोला था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से चिकित्सा की स्नातक उपाधि प्राप्त कर उन्होंने लवकुशनगर में चिकित्सक बन जन सेवा शुरू की थी। उनके कुशल चिकित्सक ,बेबाक पत्रकार और एक ईमानदार ,स्पष्ट वक्ता एवं मृदुभाषी जिंदादिल इंसान की मिसालें आज भी लोग देतें हैं।" पत्रकारिता में वे इस अंचल के जनक थे।
शत शत नमन !
चरणों को सिर रख कर प्रणाम !
श्रद्धानवत -
शानू -वंदना ,आशीष -अर्चना ,
सब्यसांची ,यश्वी व यश।
प्रतिष्ठान -(पापा !आप की कृपा से सब काम हो रहें हैं ....... )
- RK Teachers Training Institute-Lav Kush Nagar.
- RK College Of Science and Technology Lav Kush Nagar.
- RK Hospitality Ventures.
- Travel Xpert Khajuraho.



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