समय के साथ साथ-
क्यों बदलता जा रहा है-
रिश्तों का साथ ? रिश्तों की परिभाषा?
अपनों का साथ? अपनों की आशा?
पराये क्यों हो गए है अपने?
और....
अपने ही क्यों हो गए है पराये?
राखी ,खून, आंसू ,वचन,आशा,विश्वास,कसम,सौगंध जैसे वचन क्यों बन गए हैं शब्द?
और चले गए हैं -नेपथ्य मे -
और लड़ रहे हैं -अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई!
जहाँ व्यवसायिकता का तूफ़ान .....
भावनाओं के इन तप्त बादलों को धूमिल करने का पूरा जतन कर रहें हैं;
और वह दिन दूर नहीं जब हम सभी लोग या आने वाली पीढियां-
इन सारगर्भित भावनाओं के अर्थ जानना चाहेंगे ?
आओ कुछ जतन करें-
कुछ यतन करें-
जो इस अभिशप्त मानवता के लिए-
वरदान से कम न हो!
आओ इन उखड़ते रिश्तो की सुगबुगाहट को सुनें-
टूटती राखी की डोर को थामें-
बुढ़ापे में माँ का फिसलना और पिता का लडखडाना देखें-
प्यार के वचन को समझे -
और ......
भाई-बहन के प्यार-स्नेह-अपनत्व के मायने जाने !
आओ गढ़े इक नई मानवता की 'इबारत' और 'इमारत'
जहाँ सिर्फ प्यार और विश्वास की नीव हो और
पवित्र आँसुओं की सींच हो !
क्यों बदलता जा रहा है-
रिश्तों का साथ ? रिश्तों की परिभाषा?
अपनों का साथ? अपनों की आशा?
पराये क्यों हो गए है अपने?
और....
अपने ही क्यों हो गए है पराये?
राखी ,खून, आंसू ,वचन,आशा,विश्वास,कसम,सौगंध जैसे वचन क्यों बन गए हैं शब्द?
और चले गए हैं -नेपथ्य मे -
और लड़ रहे हैं -अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई!
जहाँ व्यवसायिकता का तूफ़ान .....
भावनाओं के इन तप्त बादलों को धूमिल करने का पूरा जतन कर रहें हैं;
और वह दिन दूर नहीं जब हम सभी लोग या आने वाली पीढियां-
इन सारगर्भित भावनाओं के अर्थ जानना चाहेंगे ?
आओ कुछ जतन करें-
कुछ यतन करें-
जो इस अभिशप्त मानवता के लिए-
वरदान से कम न हो!
आओ इन उखड़ते रिश्तो की सुगबुगाहट को सुनें-
टूटती राखी की डोर को थामें-
बुढ़ापे में माँ का फिसलना और पिता का लडखडाना देखें-
प्यार के वचन को समझे -
और ......
भाई-बहन के प्यार-स्नेह-अपनत्व के मायने जाने !
आओ गढ़े इक नई मानवता की 'इबारत' और 'इमारत'
जहाँ सिर्फ प्यार और विश्वास की नीव हो और
पवित्र आँसुओं की सींच हो !
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