Monday, June 25, 2012

"सिर्फ तुम्हारी ही सिर्फ तुम्हारी!!!!!"

" तुमने कहा नहीं-
तो मैंने कहा -नहीं !


तुमने कहा- प्लीज! आज नहीं!समझो न !
किसी को पता चल जायगा! 
मैंने कहा ठीक है !


तुम बोली-इस जन्म नहीं 
तब मै बोला-क्यों?
इस जन्म क्यों नहीं?


जानू ! ऐसा क्यों हुआ?
मैंने तुम्हारी हर 'न' को 'न' बोला 
पर .......
तुम मेरी इक आखिरी  'हाँ' को 'हाँ' न बोल सकीं?

याद है-
तुमने कहा-खुश रहा करो- मैं रहा!
तुमने कहा-मुझ से दूर रहना-मैं रहा!
तुमने कहा -मुझे देखा मत करो-मैंने तुम्हें देखना बंद कर दिया!
जानती हो क्यों?
क्यों कि -अपने ग्रीटिंग कार्ड मे तुमने अपने गाढे पेन से लिखा था -
"सिर्फ तुम्हारी ही  सिर्फ तुम्हारी.............."


मैंने तुम्हारी मांग को फोटो मे सिन्दूर से भरा !
अपने आंसूओं को जो तुम्हारी याद मैं तुम्हारी फोटो पे गिरे -अपनी उंगलियो से पौछा!
जानती हो क्यों?
बस वो पांच शब्द- "सिर्फ तुम्हारी ही  सिर्फ तुम्हारी"!

सबसे बड़ा दुःख और आघात तब हुआ जब तुम बोली-
"मुझे भूल जाओ" प्लीज़ मुझे भूल जाओ !मैं किसी और की हूँ!किसी और की!"
तुम किसी और की हो या रहो वो किस्मत की बात है जानू !
पर .....
तुम्हारे उन शब्दों का क्या?उन सपनों का क्या ?जहाँ तुमने लिखा था-
" सिर्फ तुम्हारी ही  सिर्फ तुम्हारी."

काश तुम समझ पातीं कि -
 "सिर्फ तुम्हारी ही  सिर्फ तुम्हारी."
का मतलब क्या होता है!!!! "

"कुछ सपने बन ढल जाएँगे,
कुछ दर्द चित्ता तक जाएँगे,
उसमे इक दर्द -तुम्हारा होगा!!
उसमे इक दर्द तुम्हारा होगा!!!!! "





No comments:

Post a Comment