Wednesday, June 27, 2012

'सव्यसांची' का लक्ष्य !!!

"ज़िन्दगी की डगर  चाहे कितनी ही टेढ़ी-मेढ़ी क्यों न  हों-
रंग चाहे कितना भी भ्रमित करें-
अर्जुन की भांति अपने लक्ष्य की ओर  देखो; जो-
तुम्हे वहां पहुचाएगा जहाँ के तुम हकीकत में हकदार हो!!"


"इन  रंगीन-हसीन रास्तों ने-
सदियों पहले 'महावीर','गौतम बुद्ध' और 'सव्यसांची' अर्थात वीर अर्जुन को भी भ्रमित करने का प्रयास किया था 
परन्तु अपने 'लक्ष्य' को पाने के लिए उन्होंने इन कंटीले रास्तों को-
 सफलता पूर्वक पार किया !"



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