फिर वो चाहे शब्दों के पत्थर हों
या ....
हकीकत के!
हम तो अक्सर शब्दों की स्याही से पत्थर बनाते हैं;
पर कभी कभी-
शब्द ही साथ न दें और बगावत पे उतर आएं-
और पत्थर उठा लें
तो हम क्या करें ?
आदि मानव ने भी सबसे पहले पत्थर ही उठाया था?
इंदिरा की वानर सेना ने भी पत्थर उठा के अंग्रेजों को ललकारा था?
आदि से अंत तक इक पत्थर ही तो हैं जो इन्सान का साथ देते हैं
वरना .....
पत्थर दिल इंसान कब से इंसानों का साथ देने लगे???"

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