Wednesday, October 31, 2012

"पुरानी दीवारें कुछ याद दिलाती हैं!"

"पुरानी दीवारें कुछ याद दिलाती हैं कि -
यादें कभी ख़त्म नहीं होतीं चाहे 
कितनी ही समय की परते 
रास्तों पे पिघल जाएँ !!!"

पुराने रिश्ते भी कुछ याद दिलाते हैं कि- 
कभी एक ही दिशा में देखा था-
दोनों ने -
इक-दूसरे को विश्वास और प्रेम की डोर में बांध के! 
चाहे अब-
वो मजबूत डोर बन कर रह गई हो-
अब इक अध्-जली रस्सी !

पुराने कपडे भी कहते हैं कि -
कभी अपनाया था तुमने उन्हें 
बड़े जतन  से और देखे थे स्वप्न सुन्दर-मदहोश!
पर ......
समय के साथ त्याग दिया उन्हें जब-
छेद हो गया उनमे और 
कगार पे पहुचे वे कपडे -
चुकी हुई -मूंगफली बनने के!

पुराने जूते  भी अपना दर्द बयां करते है-कि 
कभी भी उन्होंने तुम्हे धोका नहीं दिया जब- 
बहुत जल्दी में थे तुम-क्यों की तुम्हें मिलना था उससे; ठीक चार बजे और फिर-
दबे पाँव होस्टल पहुंचना था -
खुशी और प्यार का दीदार करने के बाद!

अभी भी वक़्त है-
अपना लो उन सभी को जिन्हें समय के साथ 
छोड़ दिया है तुमने बहुत दूर तन्हाई में -
और .....
आज भी पश्चाताप के भाव से उन्हें याद कर 
अपना थूंक गुट्कते  हो -
अकेले में-जब कोई नहीं होता-तुम्हारे पास!

याद रखो बस इतना ही की -
रिश्ते कभी नहीं मरते!
सिर्फ हमारा नजरिया मरता है और 
हम सोचते हैं कि -
रिश्ता ख़त्म हो गया!"




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