खजुराहो किसका है???
"खजुराहो का असली मालिक कौन?
खजुराहो का असली नेता कौन???
खजुराहो का असली शुभ चिन्तक कौन???
खजुराहो का सरपरस्त कौन???
खजुराहो का चौकीदार कौन???
खजुराहो का पल्लेदार कौन???
और ....
खजुराहो का थानेदार कौन???
आज "विश्व पर्यटन दिवस" पे-
बहुत सारे ठेकेदार इक्कट्ठा हो कर-हुंकार भरेंगे की वो ही खजुराहो के असली शुभ चिन्तक हैं-
और उन्हीं के सुरक्षित हाथों से -
इस कस्बे का उद्धार होगा!
Cheers Cheers Cheers !!!
Happy World Tourism day!!!
Happy World Tourism day !!!
Long Live Khajuraho !!!
- उद्धार तो कभी "टी एस बर्ट" ने भी किया था
- उद्धार तो चंदेलों ने भी किया था जिन्होंने अपने ख्वाब को मूर्त रूप दे कर
- उद्धार तो-खजुराहो के महाराज जी ने भी किया था जिन्होंने अपना सब कुछ निछावर कर दिया था इन मंदिरों को को विश्व मंच पे लाने के लिए-
- असली उदधारक तो स्वयं भगवान् मतंगेश्वर हैं; जिन्होंने खजुराहो और उसकी कला को चिरंतनता का अमर वरदान दे कर स्वयं उसकी रक्षा का भार लिया और खुद विराजमान हो गए-अपना त्रिशूल ले कर इस कस्बे की रक्षा के लिए !!!
- उद्धारक तो पवनपुत्र हनुमानजी भी हैं जो राजनगर के पास "चोडा-खेड़े" में विराज कर और सेवाग्राम खजुराहो में विराज कर अपनी कृपा बनाये हुए हैं!उन्होंने ही दशकों पहले स्व,हरिवंश राय बच्चन को खजुराहो आ कर कुछ अमर पंक्तियाँ लिखने को कहा था जिन्हें आज हम उन्हीं के पुत्र अमिताभ की आवाज़ में रोज -Light & Sound Program me में सुनते हैं और स्वम पवन पुत्र की दक्षिण मुखी सबसे बड़ी मूर्ति है!
- रक्षक तो एअरपोर्ट boundary के किनारे स्थित "माता मंदिर "भी हैं जो अपने आँचल में खजुराहो के सारे दुःख समेटे हुए हैं!
- और वो क्लार्क होटल की दीवाल से सटा हुआ चबूतरा- नदी किनारे वाला हम कैसे भूल सकते हैं जो वाहनों की रक्षा करते हैं!
"असल में अपने अपने समय में सभी ने अपना अपना काम पूरी ईमानदारी से किया और जीवन पथ पे आगे बढ़ गए!!!"
- चाहे वो बर्ट साहब हों या चंदेल वंशज हों अथवा स्वर्गीय दाऊ साहिब अर्थात स्वर्गीय कुंवर अर्जुन सिंह हों???
- परन्तु हम उन्हें भी कभी नहीं भूल सकते या नज़र अंदाज़ कर सकते हैं जिन्होंने खजुराहो नाम के खंडहर हो चुके जर्जर ध्वस्त कस्बे और उसकी धरोहरों को उचित मंच प्रदान किया -फिर चाहे वो -श्री कांति पोतदार हों या श्री अशोक जैन हों अथवा वयोवृद्ध श्री लावानियाँ जी हों!
- स्वर्गीय श्री अनिल ओस्मंड,जापानी बाबु अथवा उन आत्माओं को हम कैसे बिसरा सकते हैं जिन्होंने एक ज़िन्दगी लगाई इस खजुराहो नाम की अबूझ पहेली को सुलझाने में!
- आवाज़ के ऋणी तो हम श्री अमिताभ बच्चन के भी हैं जिन्होंने- "Light & Sound show" के माध्यम से इस खजुराहो नाम के काव्य को जीवंतता प्रदान की!
- और भी इक नाम है जो बड़ी तन्मयता से अपना काम किये जा रहा है और विश्वास है की हमेशा करता रहेगा और वो नाम है -आदरणीय श्री ब्रिजेन्द्र सिंह मामाजी guide का;जिन्होंने भी लाखों बार अपनी वाणी से खजुराहो को मंचासीन किया है!
आज जब सारी दुनिया पर्यटन दिवस मन रही हैं हम क्यों बात करें उनकी जो दीमक और लालच भरी नजरों से देख रहें है -विलक्षण खजुराहो को !जो आज गर्व से मंचासीन है- अपने हुनर और कला के बल-बूते पर और कोशिश कर रहा है कि -आगे और आगे बढ़ता ही जाये।
आओ कोशिश करें -खजुराहो को भू-माफियाओं से बचाने की ;जो सुड़क या गुटक जाने को तैयार हैं-खजुराहो के चंदेल कालीन तालाब और बेशकीमती जमीनें जिन पर येन-केन-प्रकरेण कब्ज़ा कर ये नकाबपोश सफेदपोश तथाकथित "खजुराहो के शुभ-चिन्तक" इस चंदेल कालीन कसबे को गर्त पे लाने की कोशिश कर रहें हैं!
"देखना यह है कि -वो भागीरथ तारनहार कौन है जो इस धरा को इन जिंदा दानवों से बचा कर वर्ष 2050 ईस्वी के बच्चों के लिए उपहार स्वरुप विरासत में खजुराहो नामक यह "विश्व दाय स्मारक " भेंट कर के जायेगा??? "
आओ कभी अपनी चुश्कियों के बीच कुछ समय उस -खजुराहो को भी दें जो बड़ी खामोशी से हम सब को पाल रहा है -बिना किसी न-नुकुर के???
आओ सच्चे मन से सोचें -
खजुराहो का असली मालिक कौन?
खजुराहो का असली नेता कौन???
खजुराहो का असली शुभ चिन्तक कौन???
खजुराहो का सरपरस्त कौन???
खजुराहो का चौकीदार कौन???
खजुराहो का पल्लेदार कौन???
और ....
खजुराहो का थानेदार कौन???"
उत्तर है दोस्तों -सिर्फ हम!सिर्फ हम!
जय जय मतंगेश्वर महादेव जय जय !!!!!


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