"चले गए अपने
और दे गए एक मजबूत बाहुपाश
जिसने सात जन्मों के रिश्तों में
हम सब को बाँध दिया है .....
अपनी अम्मा जी के नाम के आगे -स्वर्गीय लगाना
कुछ ऐसा लगता है -जैसे जाने वाले को जबरन जाने को कह रहे हों?
माना कि अपनी अम्मा -स्वर्ग सिधार गईं
पर अपनी अम्मा तो आज भी हम सब के साथ में हैं
रग -रग में हैं,कतरे कतरे में हैं ,खून की बूंद बूंद में हैं और अपनी
यादों में हैं वादों में हैं
साँसों में हैं।।।
हम सभी अम्माजी की तेरहवी में इक्कठा थे
पर क्या ऐसा लगा कि -
अम्मा हमारी अम्मा हम सब के बीच नहीं हैं???
बल्कि हमें तो ऐसा लगा कि जैसे-
-अपनी अम्मा कह रहीं हों-
देखो रामा "अस्सो" बाहर निकल गओ पकड़ो गिर न जाय!
सविता कां गई?
मंजू अबे तक नैं आइ ?शाम हो गई?
पिरभा ने माचिस कितेक रखी ?
राजू देखो बद्री काय बुला रओ ?
जो असीस भौतई छकाएँ हैं!
और----
तुम ओरें हमाए सब - नाती-नातिनन को ध्यान राखिओ !
सच कहा न मैंने???
हम सभी लोगों को कल मऊ में ऐसा ही लगा ???
और ऐसा लगा जैसे अम्मा अपने आँगन में
अपनी नातिनों -नाती,बिटिया-दामादों,और बेटों को देख के-
संतोष में होंगी की -
चलो सभी ऐसे ही मिलजुल के रहना और-
मौरानीपुर का घर कभी मत छोड़ना
और ......
सुखदुख हमेशा मिल-बैठ के मानना!!!
अम्मा आप की भाषा और भाव हम सब ने समझ लिए हैं और

हम-सब हमेशा आप और पूज्य दद्दा जी के आशीर्वाद से
मिल जुल के रहेंगे!!!
मौरानीपुर की बड़ी देवीओं की छाया में पनपा यह कायस्थ परिवार का वट-वृछ सदा ऐसे ही फलता फूलता रहेगा!आप दोनों की छाया और आशीर्वाद के सहारे सफलता का सौपान हम सभी हमेशा करते रहेंगे!
और दे गए एक मजबूत बाहुपाश
जिसने सात जन्मों के रिश्तों में
हम सब को बाँध दिया है .....
अपनी अम्मा जी के नाम के आगे -स्वर्गीय लगाना
कुछ ऐसा लगता है -जैसे जाने वाले को जबरन जाने को कह रहे हों?
माना कि अपनी अम्मा -स्वर्ग सिधार गईं
पर अपनी अम्मा तो आज भी हम सब के साथ में हैं
रग -रग में हैं,कतरे कतरे में हैं ,खून की बूंद बूंद में हैं और अपनी
यादों में हैं वादों में हैं
साँसों में हैं।।।
हम सभी अम्माजी की तेरहवी में इक्कठा थे
पर क्या ऐसा लगा कि -
अम्मा हमारी अम्मा हम सब के बीच नहीं हैं???
बल्कि हमें तो ऐसा लगा कि जैसे-
-अपनी अम्मा कह रहीं हों-देखो रामा "अस्सो" बाहर निकल गओ पकड़ो गिर न जाय!
सविता कां गई?
मंजू अबे तक नैं आइ ?शाम हो गई?
पिरभा ने माचिस कितेक रखी ?
राजू देखो बद्री काय बुला रओ ?
जो असीस भौतई छकाएँ हैं!
और----
तुम ओरें हमाए सब - नाती-नातिनन को ध्यान राखिओ !
सच कहा न मैंने???
हम सभी लोगों को कल मऊ में ऐसा ही लगा ???और ऐसा लगा जैसे अम्मा अपने आँगन में
अपनी नातिनों -नाती,बिटिया-दामादों,और बेटों को देख के-
संतोष में होंगी की -
चलो सभी ऐसे ही मिलजुल के रहना और-
मौरानीपुर का घर कभी मत छोड़ना
और ......
सुखदुख हमेशा मिल-बैठ के मानना!!!
अम्मा आप की भाषा और भाव हम सब ने समझ लिए हैं और

हम-सब हमेशा आप और पूज्य दद्दा जी के आशीर्वाद सेमिल जुल के रहेंगे!!!
मौरानीपुर की बड़ी देवीओं की छाया में पनपा यह कायस्थ परिवार का वट-वृछ सदा ऐसे ही फलता फूलता रहेगा!आप दोनों की छाया और आशीर्वाद के सहारे सफलता का सौपान हम सभी हमेशा करते रहेंगे!

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