Sunday, September 16, 2012

"खुदा की लाठी चलती है तो आवाज़ नहीं करती!"

















"क्यों लगने लगा है आस्थाओं,आदर्शों और अपनों से डर ???
क्यों ऐसा लगता है कि -मर्यादा,ईमानदारी और वफादारी बेकार की बातें है;
और इसे अपनाने से कुछ ख़ास हासिल नहीं होने वाला है और
इस प्रकार पूज्य बापू के-"शोध सत्य के साथ" के फलसफों को अपना या लागू कर -
मै अपने बच्चों को धकेल रहा हूँ -
ज़िन्दगी की दौड़ में कई हाथ पीछे ........?????

"जो ईमानदार नहीं है वो क्यों सफलता के झंडे गाड रहे हैं ???
जो बेईमान हैं वो क्यों सुख से ज़िन्दगी गुजार रहें है???
और कभी कभी तो बड़ा आश्चर्य होता है जब
पूज्य ईश्वर  के मंदिर में ये लोग -
मुझ से ज्यादा प्रसाद चढाते हैं और महंगी महंगी अगरबत्तियो से ऊपर वाले का आहवान करते हैं और
उन्हें देख के लगता है जैसे-
ये ही सच्चे पुजारी हैं और मै  तुच्छ पापी जो अपने पापों के कारण
भगवान् का भी सामना नहीं कर पा रहा हूँ???"

सभी कहते हैं कि -चिंता मत करो -"खुदा की लाठी चलती है तो आवाज़ नहीं करती!"
ईश्वर-न्याय जरूर करता है और उसकी मर्ज़ी से ही सब-कुछ होता है!
पर ईश्वर का ऐसा कैसा न्याय जो-
तोड़ दे उसके प्रति हमारी आस्था और विश्वास को?
प्रश्न चिन्ह लगा दे हमारी कर्मठता और ईमानदारी को?
या--
विश्वास को ही डिगा दे???

अब सबसे बड़ी दिक्कत यह नहीं है कि -मै  ज़िन्दगी की रेस में पीछे रह गया पर---
दिक्कत यह है की-आगे आने वाली पीढी को उस परम पिता परमेश्वर के बारे में क्या बताऊँ जो सदियो से
सत्य और न्याय का हम-सफ़र रहा है???
यह ठीक है कि -कल युग है पर .....
कलयुग में "भ्रष्ट" तो हम हैं न??? फिर ?
भगवान् के न्याय पर सवाल क्यों ???
उसकी तर्क संगत  नवीन परिभाषा क्या हमें स्वयं गढ़नी पड़ेगी???
कितने प्रश्न कितने तर्क ......
अरे पर बिचारे भगवान्!!! को तो छोड़ दो-उसने क्या बिगाड़ा?????
कुछ कुछ ऐसा ही आप सभी सोच रहें होंगे???है न???

पर चिंता मत करो!!!
इसी को इम्तिहान कहते हैं।

अपने विचार जिंदा रखो!
अपने ख्वाब जिंदा रखो।
अपने मील के पत्थर ताकते रहो।
अपने कर्तव्य याद रखो।
अपने वादे दोहराते रहो।
अपने कायदे पे कायम रहो।

फिर देखना एक दिन-

अँधेरों के बाद रौशनी आएगी!
उमस के बाद बारिश होगी।
ठण्ड के बाद सुनहली धूप निकलेगी।
और ........
राहत,सुकून व सफलता की ब्यार चलेगी

देखना एक दिन---
बेटा "आई ए एस " में सिलेक्ट होगा।
बिजनेस ठीक-ठाक चलेगा।
बुढ़ापा सुकून से बीतेगा।
और .......
और .......
और भी बहुत कुछ होगा।

बस इतना करना कि -
अगरबत्ती वही सस्ती वाली लगाते-जलाते रहना
और ......
आस्था और विश्वास को कभी खंडित मत करना
क्यों कि यही कुछ जीवन सत्य रह गए हैं जो
कभी संतृप्त मानवता को
नई दिशा देंगे!!!!!"





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