"यह ठीक है कि-
ज़िन्दगी की दौड़ में मै पिछड़ गया हूँ।
पर मै हारा नहीं हूँ!
मै हताश नहीं हूँ !
और निराश नहीं हूँ!
जज्बा अभी जिंदा है,
आग अभी भी सुलग रही है,
सपने अभी भी तैर रहें हैं,
या यूँ कह लो कि -
ख्वाब अभी ज़मीदोज नहीं हुए हैं!
ऐसा नहीं है कि -
वही घिसा-पिटा तर्क दूं कि -
ईश्वर ने साथ नहीं दिया या
किस्मत ठीक नहीं थी भाई!
और----
कोशिश तो बहुत की पर क्या करूँ सफलता नहीं मिली।
ईश्वर,किस्मत और मेरी मेहनत मेरे साथ हमेशा रही और आगे भी रहेगी।
इन आधार स्तंभों के कारण ही-
सच्चा जीवन साथी मिला,
प्यारे प्यारे दो बच्चे मिले,
बड़े बड़े तो नहीं पर छोटे छोटे सपने साकार हुए,
और-----
इतने भीषण एक्सीडेंट के बावजूद भी -
मेरा परिवार अखंडित रहा और आज मै जिंदा हूँ।
असल में भगवान् और पूर्वज उतनी ही मदद और दया करते हैं जितने के आप हक़दार है।
दूसरों के पास लाखों-करोड़ों रुपए हों पर कुछ तो बात है जो मुझे विचलित नहीं करती?
इसे मेरी अकर्मण्यता कह लो या मेरा आत्म-विश्वास ?
मै सुकून में हूँ क्यों कि -
मुझे संतोष है अपनी उप्लब्धियों पे और अपने उन सपनों पे -
जो मुझे और मेरे भगवान को, मेरी आस्था को मेरे अन्दर-आज भी जीवित किए हुए हैं।
जिससे ---
मेरे अन्दर समाई सपनों को जीवंत करने की जीजिविषा कहीं ख़त्म न हो जाय और-
यही चंद बातें कहीं उदाहरण न बन जाएँ ----
आगे आने वाली पीढयों को -
मेरे सफलता के पैमाने को नापने की।।।"


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