Saturday, May 11, 2013

बदलते हुए हिंदुस्तान को देख रहा हूँ-




बदलते हुए हिंदुस्तान को देख रहा हूँ-

देख रहा हूँ!


  • अटल जी को कुछ न बोलते हुए।
  • अटल जी के बारे में कुछ न सुनते हुए 
  • और इक ध्रुव तारे को अस्ताचल की और विचरण करते हुए।
देख रहा हूँ:
  • मोदी को बोलते हुए।
  • जनता द्वारा मोदी को तौलते हुए। 
  • और मोदी को खौलते हुए।
देख रहा हूँ:
  • रविशंकर प्रसाद के सधे हुए अन्दर तक झंझकोरते हुए वक्तव्यों को। 
  • दिग्विजय सिंह जी के मुस्कराते सधे शब्दों को।
  • और किरीट सोमैया की  औचक पोल खोल को।
समझ रहा हूँ :
  • केंद्र सरकार के मंत्रियों के इस्तीफे को। 
  • मनमोहन के असमंजस को। 
  • और कांग्रेस की हथेली से सत्ता की फिसलती हुई रेत को।
ढूढ रहा हूँ:
  • बापू के नजरिए को - उनकी कांग्रेस को ?
  • नेहरु की सोच को और उनकी कांग्रेस को? 
  • और!स्व . इंदिरा गाँधी के जीवट को और उनकी कांग्रेस को?
पता नहीं कहाँ है ?
  • वो पुरानी कांग्रेस?
  • वो पुरानी कांग्रेसी टोपी वाला जज्बा ?
  • वो हिंदोस्तानियत वाला जीवट 
या .........
  • "वो गाय-बछड़े" वाली कांग्रेस जो "पंजे" वाली कांग्रेस की असली माँ थी?

"कोई ढूंढे उस पुरानी वाली कांग्रेस को?
वोह पता नहीं कहाँ चली गई?
मैंने अपने दादा जी और नाना जी से सुना था-
वो कांग्रेस बहुत अच्छी थी!"
हाँ वो कांग्रेस बहुत अच्छी थी।

पर ....
अब पता नहीं ?
कहाँ चली गई ?
वो  पुरानी वाली कांग्रेस?




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