Sunday, May 5, 2013

चुनाव का समय!


चुनाव का समय नजदीक है-
किस पर विश्वास करूँ किस पे नहीं ?
समझ नहीं आता?

सभी नेता रंगे सियार नज़र आते हैं।
सभी नेता बेहतरीन अभिनेता नज़र आते हैं।

ऐसा नहीं हैं कि-तुम बहुत अच्छे हो?
बल्कि ....
बात यह है कि-पुराने वाले भी नंगे हैं।
और…अब तुम भी।
जब हम्माम में सभी नंगे हों-
तो ......
आम आदमी क्या करे या कहाँ जाये?
किसको चुने और किसे नकारे?

काश-ऐसा संविधान में भीम राव अम्बेडकर लिख गए होते कि-
जो इक बार चुनाव में जीते वह दुबारा चुनाव न लड़ पाए?
जो एक बार चुनाव में हार जाए वह दुबारा जीवन में कभी चुनाव में खड़ा न हो पाए? 
तो कम से कम ....
दुकाने बदलती रहतीं या
हर चुनाव में फ्रेश यानी ताज़ा आइटम खड़े होते और ....
बासे टमाटर सड़े बैगन या कच्चे आलू हर चुनाव में न खाने पड़ते
या न झेलने पड़ते?

काश इन नेताओं की भी रिटायरमेंट की उम्र होती
जहाँ ....
न यह चुनाव लड़ पाते न मनोनित होते?

कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है।
कौन कहता है?भारत एक नहीं है???

अरे भाई कश्मीर से कन्याकुमारी तक -
भ्रष्टाचार भी तो एक है???

हे मतदाता कुछ करो?
कुछ करो?

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