Tuesday, August 20, 2013

वफ़ा!!



ज़िन्दगी को जान लेने के बाद कह सकता हूँ कि -

"टूटे हुए प्यार में भी
वफ़ा होती है।

अब कभी न मिलने की वफ़ा ।
अब कभी याद न करने की वफ़ा ।
अब कभी उस गली-ओ-शहर से न गुजरने की वफ़ा जहाँ "तेरा" ठिकाना था ।

चिट्ठियों को जला के राख कर देने की वफ़ा।
यादों को आँखों के फलक से मिटा देने की वफ़ा।
और वादों को झुठला देने की वफ़ा।

कभी अकस्मात मिल जाने पे "अजनबी " बन जाने की वफ़ा।
कभी अकेले में मिल जाने पे "हदें" न लांघते हुए मुस्करा के निकल जाने की वफ़ा।
और बस मन ही मन में भगवान के सामने "इक-दुसरे" की सलामती की दुआ मांगने की वफ़ा ।

सच.…………………
"वफ़ा" प्यार पाने में भी है।
वफ़ा प्यार खोने में भी है।

"प्यार" पाने में पूरे जन्म भर पूरी "शिद्दत" से  प्यार निभाने की वफ़ा!
और.…………….
"प्यार" खोने के बाद-
पूरे जन्म भर पूरी "शिद्दत" से अपने "प्यार" को अपना "राज" बना के सीने में दफ़न करने की वफ़ा!
और.………………….
अगले जन्म फिर मिलने की दुआ करने की वफ़ा। "


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