कश्तियाँ खेते रहो ..
किनारे मिल ही जाएंगे !
मोहबत्तें करते रहो ..
निभाने वाले मिल ही जाएंगे !
सच के साथ चलते रहो ..
झूंठे फिसल ही जाएंगे !
अंधेरों को नकारते रहो ..
उजाले मिल ही जाएंगे !
दर्द सहते रहो ..
हमदर्द मिल ही जाएंगे !
और ..
ख्वाब संजोते रहो ..
एक दिन सच हो ही जाएंगे !
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