'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Thursday, September 21, 2017
वो भी क्या उम्र थी ..क्या ज़िद्द थी !
वो भी क्या उम्र थी !
वो भी क्या ज़िद्द थी !
मैं ..
तुम्हें पाना और ..
पा कर रखना चाहता था ! और तुम ;
मुझे पाना और ..
पा कर खोना !
न मैं ; तुम्हें पा पाया और ..
न तुम; मुझे खो पाईं !
बस ..
"पाने खोने में गुज़र गई ज़िन्दगी ;
बिन तेरे !"
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