Monday, September 4, 2017

मिट्टी के फूलों का अपने वटवृक्ष को संदेश !

आदरणीय गुरुजन!
दो शब्द आपको न्योछावर !

"पिता न होकर भी; पिता !
माँ न होकर भी; माँ !
सूर्य न होकर भी; प्रकाश !
वक़्त न होकर भी ;भविष्य!
ज्योतिषी न होकर भी वर्तमान बांच कर ज़िन्दगी संवार देने वाले पंडित !
आदरणीय श्रद्धेव गुरुजनों को सर रख कर कोटि कोटि प्रणाम !!
'आपके दिए पंखों ने अब विस्तारित हो कर -डैनों का रूप ले लिया है !'
'आपके अंकुरित स्वप्निल ख़्वाबों ने ...
यथार्थ रूपी सफलता का रसपान करना शुरू कर दिया है !'
'सफलताओं के कण कण में माँ पिताजी के साथ आप विराजमान हैं !'
'कोटि कोटि नमन ..
ज़िन्दगी में आने का और ज्ञान रौशनी बन अपने सम्पूर्ण वज़ूद के साथ ...
हम सभी में समा जाने का !'
आपके सदैव -
(मिटटी के फूल !)

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