उम्र बीत रही है; आहिस्ता ..आहिस्ता !
मोहब्बत भी हुई; आहिस्ता .. आहिस्ता !
बेवफाई भी गले लगी; आहिस्ता ..आहिस्ता !
हाथों की लकीरों में समाये लोगों ने-
घूंघट उठाये; आहिस्ता ..आहिस्ता !
अपने बिछड़े; आहिस्ता .. आहिस्ता !
नईं कोंपलें...किलकारी संग आईं; आहिस्ता...आहिस्ता!
कोंपलें ..पौधे ..फिर वृक्ष बने; आहिस्ता ..आहिस्ता !
हम वटवृक्ष बने; आहिस्ता .. आहिस्ता !
वटवृक्ष गिरने लगा; आहिस्ता ...आहिस्ता !
गिरे वटवृक्ष के तले, नई कोंपलें फूटी; आहिस्ता .. आहिस्ता !
और कुछ ऐसे ही ;
ज़िन्दगी कट गई ...
आहिस्ता ..आहिस्ता !
शायद कभी ..भगवान् के भी ..
दीदार हो जाएंगे;
आहिस्ता ..आहिस्ता !
[Garvit Gaurav]
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