पापा प्यारे पापा !
आज आपकी नातिन/पोती ने
अपने आँसू निकाले
आपकी याद में
ये कहते हुए कि -
माँ !सबके दादा जी हैं फिर मेरे क्यों नहीं ?
उसकी माँ ने उसे फुसलाया और कहा कि -बेटा !
तुम्हारे दादा जी तुम्हें बहुत चाहते थे और कहते थे कि-
शानू !हाथ न लगा लेना मेरी बेटी में-
इस घर की लाडो है !
लड़कियां किस्मत वालों को मिलती है!
और वो हम है जहाँ इतनी प्यारी ईशा आई है।
वो बोली कि-माँ दादाजी का प्यार कैसा था ?
वो कैसे थे ?
उनका प्यार कैसा था ?
मेरे लिए गुड़िया लाते न ?
मुझे घुमाने ले जाते न ?
मुझे परी ड्रेस लाते न ?
न जाने कितने सवाल-
कुछ बेतुके कुछ अटपटे!
कुछ मासूम कुछ अपने !
आज जब आपकी तिथि है-
मैं आपको स्मरण कर श्रद्धा और श्राद्ध से आहुति देता हूँ-
तब आपकी यही पोती-
अपने नन्हें नन्हे हाथों से-
प्यारी सी रुई की बाती बना के-
अपने दादा जी की फोटो के सामने-
दीया और बाती के सहारे अपना प्यार अपनी श्रद्धा-
अपने दादा जी तक पहुंचा रही थी।
बस.………।
अब यही इच्छा है कि
आपकी इन दोनों अमानतों को
जीवन में सही मुकाम दिलवा सकूँ
जिससे ……
आपके स्वप्नों को साकार रूप दे सकूं !


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