Wednesday, September 4, 2013

मेरे शिवराज मेरे शिवराज !

"बहुत छोटी है हमारी औकात।
बहुत औछी है बात ।
बहुत हलके है हमारे जज्बात।
और......
बहुत अदने हैं हमारे स्वप्न ओ खास।
मेरे शिवराज मेरे शिवराज !

बस तुमसे है आस!
बस तुमसे है आस!
क्यों की तुम हो हमारी -आस!
तुम पे है विश्वास!
क्यों की-
तुम हो हमारे आम ओ खास!
इसी लिए निकालते है-
तुमसे अपनी भड़ास!
ओ म.प्र. के सरताज!
शिवराज शिवराज! 

टूट गई है चश्मे की डोर,
टूट गए हैं दांत,
और अब खाँसी भी बहुत आती है।
उदासी सितम धाती है।
बिछड़े जीवन साथी की याद आँख में पानी भर लाती है।
फिर अब हम भी कितने दिन के साथी हैं?
औलादों ने भी छोड़ दिया है साथ,
पेंशन लेने में कोई नहीं सुनता बूढ़े की बात,
देख रहें है उप्पर वाले की तरफ और हेरे हैं अपनी बाट।
हमें विश्वास है कि -अब तुम ही बचाओगे हमारे बुढ़ापे की लाज ?
मेरे शिवराज !मेरे शिवराज !


गिरा दो अपनी गाज!
उठा लो अपना गांडीव!
खोल दो अपना तीसरा नेत्र !
और उठा कर कर दो शंख नाद!
जिससे ख़त्म हो जाये -ये उन्माद!
और-
आ जाये हमारी ज़िन्दगी में भी थोड़ी सा स्वाद!
मेरे शिवराज मेरे शिवराज !

मै हूँ -बेआवाज!
मै हूँ बेस्वाद!
ठस!बुन्देलखंडी निपट गंवार सिर्फ बकवास!
और पहने हूँ फटा लिबास!
कोई नहीं मेरा खास!
मै किसी का नहीं खास !
किसी से नहीं अब आस
बस तुम पे है विश्वास
मेरे शिवराज मेरे शिवराज!

मुझे पता है कि तुम जरूर सुनोगे! मेरी आवाज!!!
मेरे शिवराज मेरे शिवराज!

ठीक कर दो सड़कों को!
शुरू कर दो विश्वविध्यालय का ख्वाब!
दे दो कोई कोई ऐसी सौगात जिससे-
यहाँ भी बन जाए AIIMS जैसा अस्पताल!
हे शिवराज !
बन जाओ हमारी ढाल!
मेरे शिवराज! मेरे शिवराज! 
तुम जरूर सुनोगे हमारे हाल!
हम बेहाल !
ठीक कर दो हमारा हाल
माटी के प्यारे नौनिहाल
मेरे शिवराज मेरे शिवराज ! !'

हनुमान जी को  नारियल चढ़ा कर
विंध्यवासिनी को ज्योति जल कर
और
कमरिया वाले बाबा को चादर चढ़ा कर
मागूंगा तुम्हारे लिए कुछ खास
अपना थूंक गुटक के ,आँसूं पोंछ कर और हाथ जोड़ कर उस ऊपर वाले से फिर मागेंगे तुम्हारा साथ
मेरे शिवराज !मेरे शिवराज!

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