Thursday, December 12, 2013

लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

मुझे नहीं मालूम वो पथ-
और न है मेरे पास कोई ऐसा रथ -
जो ले चले मुझे-
तुम्हारे पास !
जहाँ है तुम्हारा निवास-
तुम्हारे विधायक बन जाने के बाद।
लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

बस-
मुझे यह मालूम है कि-
मैं गरीब था -
मैं गरीब हूँ-
और.…
गरीब रहूँगा।
 लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

कुछ दिनों के लिए बन गया था तुम्हारा खास।
तुम को मुझ से थी कुछ आस।
और अब जब पूरी हो गई है तुम्हारी वो आस-
अब तुम आ गए हो अपने असली लिबास।
बता दी है मुझे मेरी दो कोड़ी कि औकात।
और अब मैं !
तुम्हारा मतदाता!
तुम्हारा चार दिनों का भगवान् !
बन गया हूँ चलती फिरती लाश।
बदहवास ……
एक बार फिर तुम से ठगा हुआ-
तुम्हारा आम ओ खास !
लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

बस,ऑटो,टेम्पो में चलता हूँ-चलता था ;
और
चलता रहूँगा।
लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

मालूम है ?
मुख्यमंत्री और कलेक्टर से भी बड़ी औकात -
मेरे गाँव के पटवारी और थानेदार कि है जो-
खिसका सकता है मेरी जमीन-
या फंसा सकता है मुझे कोई गांजा के फर्जी केस में-
मैं ऐसा मानता हूँ।
मानता था और
मानता रहूँगा।
लोकतंत्र ज़िंदाबाद!


मालूम है ?
मैं राशन की दुकान के सेल्स मैन को "अन्न दाता"
मानता हूँ।
कोई सरकार का मुलाजिम नहीं जो-
अपना कर्त्तव्य कर मुझे राशन-पानी दे रहा हो।
बस उसकी दया और सह्रदयता से ही-
मेरा और मेरे बच्चों का पेट पल रहा है।
इसी कारण मुझे हर बार उसे-
घूंस देनी पड़ती है और ख़ुशी ख़ुशी देता हूँ।
देता रहा हूँ और-
देता रहूँगा।
लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

मालूम है ?
चाइना मोबाइल मेरे पास भी है।
छः सौ रुपए में आया।
और मैं!
मैं तुम्हारा अमूल्य मतदाता!
उस मोबाइल फोन से बात कर के या उसे-
अपनी फटी जेब में रख कर-
बहुत खुश हूँ कि चलो-
यह सपना तो सच हुआ।
कम से कम चीनी मोबाइल तो -
अपना हुआ !
देसी मोबाइल न सही विदेशी मोबाइल तो अपना हुआ।
लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

थक गए होगे ?
एक महीने "आयोग" ने बेफालतू में बहुत मेहनत करवाई!
पूरे क्षेत्र की झाड़ू लगाने में-
पांच किलो घट गया वजन और-
अब कुछ दिनों के लिए -
स्वास्थ्य पे ध्यान देना पड़ेगा !

मैंने भी तुम्हें देखा था!पूरे पांच साल बाद ?
हलकी सी उमर दिखने लगी है?
फिर अब उम्र भी तो बढ़ रही है?
एसी गाड़ी में बैठ कर,
मिनिरल वाटर पी के,
वाकई चुनाव में बहुत मेहनत पड़ गई।
खैर कोई बात नहीं -
जीत तुम्हारी हुई।
 लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

अलविदा !
फिर मिलेंगे !
पांच साल बाद !

अपना ध्यान रखना!
पांच साल बाद कहीं ऐसा न हो कि -
डाइबिटीज और हार्ट -अटैक के साथी हो जाओ और-
और हम शोक सभा करें कि-
बिचारे!
अच्छे आदमी थे!
भला नहीं किया तो-
किसी का बुरा भी नहीं किया !
फिर-
क्षेत्र में -
विकास कोन कराता है ???
लोकतंत्र ज़िंदाबाद!

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