ना तुम बेवफा न हम !
"तुम अपनी मोहब्बत के साथ ……
मैं अपनी के साथ।
तुम अपनी वफाओं के साथ .......
मैं अपनी के साथ।
निभाते उन कसमों-वादों को .......
जो खाई थीं हमने बिछड़ते वक़्त .......
फिर न कभी मिलने की ……
और न कभी साथ साथ चलने कीं।
मजा आ रहा है न ……
बिना मिले ……
मोहब्बत के वादे निभाने में ?
तुम अपने सात फेरों के जीवन साथी के साथ और -
मैं अपने सात वचनों की जीवन संगिनी के साथ।
तुम भी अपने जीवन साथी से वफादार और -
मैं भी ;मेरे नाम की मांग भरने वाली ज़िन्दगी के साथ पूरी शिद्दत के साथ।
ईश्वर साक्षी है ……
न तुम अपनों से बेवफा और
न मैं अपनों से।
बस ……
निभाना उन रिश्तों को
जो हमारी मोहब्बत को पाक और सलामत रखें।
साबित करना की .....
मोहब्बत जन्मों जन्मों का रिश्ता है जो -
शादी से मुकाम पे नहीं पहुँचता बल्कि ,
बिन मिलन के भी ……
चल सकता है ……
निरर्थक ……
बिना रुके बिना थमे …
कई जन्मों के लिए।
इक ज़िन्दगी सिर्फ हमारे प्यार के वास्ते।
इक ज़िन्दगी सिर्फ बिछड़ने के वास्ते।
इक ज़िन्दगी सिर्फ हमारी चाहत के वास्ते।
और -
सिर्फ बड़ी बेतक़ुल्लफ़ी से -
दिल का हाल छुपाने के वास्ते।
निभाना अपनी जिम्मेदारियों को
पूरी वफाओं से …
जिससे -
अगले जनम में -
हमारा दावा ;
कमजोर न पड़ जाये-
ऊपर वाले के सामने।
कथानक जैसा है
उसे स्वीकार करना भी
मोहब्बत है।
बस इक आँसूं की बूँद भी नहीं कभी मेरे नाम की या याद की ……
निभाना उन किरदारों को जो बड़े जहीन अंदाज़ में-
पिरोकर भेजे हैं हमारी झोली में
ऊपर वाले ने। "
"तुम अपनी मोहब्बत के साथ ……
मैं अपनी के साथ।
तुम अपनी वफाओं के साथ .......
मैं अपनी के साथ।
निभाते उन कसमों-वादों को .......
जो खाई थीं हमने बिछड़ते वक़्त .......
फिर न कभी मिलने की ……
और न कभी साथ साथ चलने कीं।
मजा आ रहा है न ……
बिना मिले ……
मोहब्बत के वादे निभाने में ?
तुम अपने सात फेरों के जीवन साथी के साथ और -
मैं अपने सात वचनों की जीवन संगिनी के साथ।
तुम भी अपने जीवन साथी से वफादार और -
मैं भी ;मेरे नाम की मांग भरने वाली ज़िन्दगी के साथ पूरी शिद्दत के साथ।
ईश्वर साक्षी है ……
न तुम अपनों से बेवफा और
न मैं अपनों से।
बस ……
निभाना उन रिश्तों को
जो हमारी मोहब्बत को पाक और सलामत रखें।
साबित करना की .....
मोहब्बत जन्मों जन्मों का रिश्ता है जो -
शादी से मुकाम पे नहीं पहुँचता बल्कि ,
बिन मिलन के भी ……
चल सकता है ……
निरर्थक ……
बिना रुके बिना थमे …
कई जन्मों के लिए।
इक ज़िन्दगी सिर्फ हमारे प्यार के वास्ते।
इक ज़िन्दगी सिर्फ बिछड़ने के वास्ते।
इक ज़िन्दगी सिर्फ हमारी चाहत के वास्ते।
और -
सिर्फ बड़ी बेतक़ुल्लफ़ी से -
दिल का हाल छुपाने के वास्ते।
निभाना अपनी जिम्मेदारियों को
पूरी वफाओं से …
जिससे -
अगले जनम में -
हमारा दावा ;
कमजोर न पड़ जाये-
ऊपर वाले के सामने।
कथानक जैसा है
उसे स्वीकार करना भी
मोहब्बत है।
बस इक आँसूं की बूँद भी नहीं कभी मेरे नाम की या याद की ……
निभाना उन किरदारों को जो बड़े जहीन अंदाज़ में-
पिरोकर भेजे हैं हमारी झोली में
ऊपर वाले ने। "


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