Saturday, August 30, 2014

संयोग और वियोग !

संयोग और वियोग !

कितनी तेज़ी से गुज़र रहा है वक़्त  …
कितनी तेज़ी से गुज़र रहा है ज़िंदगी का कारवां   ....
कितनी तेज़ी से गुज़र रहा है समय का पहिया   …

बचपन बहुत पीछे छूट गया।
जवानी भी अब फीकी हो गई और
सफ़ेद होते बाल आँखों की झुर्रिओं के साथ -
बताते हैं -आगे के सफर का मजमून !

इबारत से ख्वाब पूरे कर पाया।
मोहब्बत से ज़िन्दगी का फलसफा समझ आया और
इबादत से ईश्वर को समझ पाया।

इबारत से शुरू हुआ सफर इबादत पे जाकर ठहर गया है और देखना है कि अंत क्या होता है ?

अपनों का बिछड़ना  -माँ-पापा के रूप में  ……
फिर
अपनों का ज़िंदगी में आना -पत्नी-बेटा -बेटी के रूप में  …
भी अजब संयोग है।

अजब संयोग है और अजब वियोग है न ?
वही समझ सकता है जिसपे गुज़री हो !

भला वट वृक्ष की छाया वो क्या समझेगा जिसने कभी माँ बाप की उष्णता और ठंडक को समझा न हो ?
भला माँ बाप के वियोग को वो क्या समझेगा जिसने इस रिश्ते को दोस्तों जैसा मिलना बिछड़ना समझा हो ?

बस इतना समझ लो की -"इबारत -मोहब्बत-और इबादत " की इमारत के नींव के पत्थर वो प्यारे पूज्य माँ-बाप ही थे जिन्होंने -
अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया   ……
हमारे ऊपर   …
क्यों की -
हम उनकी ज़िंदगी के सफर की -
मोहब्बत थे।

आज जब हम खुद पिता हैं तो
समझ आता है -
वो त्याग और वो तप  ……
जो तीस या चालीस साल पहले  ……
उन लोगों ने हमें कुछ बनाने के लिए -
 किया था -
जिन्हें -
हम लोग आज -
पापा ,पिताजी,या बाबूजी
कहते हैं।

आज जब रात को बेटा चिपक कर सोता है -और पेट पे लात रखता है तो -
याद आती हैं; वो बचपन की भीनी भीनी रातें  ……
जब कभी हमने भी  …
अपने पापा के- पेट और छाती पे  .....
एक छत्र राज किया था।
और   ……
जब तक पापा जी लोरी न गा दें या -
पीठ पे खुजली न कर दें   ……
नींद नहीं आती थी।

सच हैं न ?
बाप बनने के बाद समझ आया की -
सच
माँ-पापा ने हमारे साथ
क्या किया।

अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है -
चलो   ……
सोते हुए माँ-पापा के पैर दबाएं   …
सोते हुए माँ-पापा को चादर उढायें   ……
माँ की गोद मे सर रख कर माँ से सर में तेल लगवाएं   …
और -
पापा से फिर वो दास्ताँ सुनें कि -
उन्होंने कैसे ये मकान बनवाया।

उन्हें अपना समय दें -
जिन्होंने हमें अपनी ज़िन्दगी दी।

उठो जागो और अपना कर्त्तव्य करो   ....
उन पूज्य माँ-पापा के साथ   …
जिन्होंने अपना सर्वस्य किया   ……
तुम्हारे लिए।
वरना.....

बुरा मत मानना -
कल    .......
आँख न मिला पाओगे उनसे -
जब वो एक छोटे से -
फोटे फ्रेम में क़ैद होकर -
उड़े रंगों वाली माला के साथ   ……
हर साल   ……
दीपावली पे -
दीपक का इंतज़ार किया करेंगे   ……
अपने -
"सदा सुखी रहो" आशीर्वाद के साथ।



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