ओ मेरे मौला ;मेरे परवरदिगार!
"फ़ेहरिश्त बहुत लम्बी हो गई है तुझसे मांगते मांगते...
मन्नतें भी बहुत हुई तुझे पूजते पूजते....
दरख्वास्तें बेतादाद हुईं तुझ से सजदा करते करते.....
बस...
अब थक गया हूँ....
चादर चढ़ाते चढ़ाते...
और फिर अब तू भी तो थक गया होगा........
मेरी फरमाइशों से...
अब रहने दे मेरे आलमगीर!
तू खुश रह अपनी नेकी के साथ और
मैं भी पुरसुकून में हूँ...
अपनी अनदेखी के साथ! "
अमीन!
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