"चलो कुछ नया करते हैं ...
चलो मन की बयां करते हैं !"
चलो मन की बयां करते हैं !"
नए बरस की ...
आमद देती -
खुशियों के बीच ...
देश के प्रति ...
उभर रही ग़द्दारियों की ..
चिल्लहटों को ..
बेजुबां करते हैं !
चलो कुछ नया करते हैं !
चलो ...
नव इबारत का ..
सृजन करते हैं !
जहां कलम की स्याही भी ...
तिरंगे से रची गई हो ...
ऐसी स्याही गढ़ते हैं !
नव स्वर लहरियों से ..
नव प्रभात में ...
भारतीयता से ओतप्रोत ..
कुछ नया करते हैं !
यकीनन उन्होंने लिए ..
कई गाँव गोद ..
चलो .....
हम पढ़े लिखे नौजवां भी ...
किसी गरीब अविकसित ..
पिछड़े कसबे को ...
"शमा" करते हैं !
हाँ चलो ...
उसे बदलते हैं !
चलो कुछ ...
नया करते हैं !
अपनी जरूरतों को त्याग ....
चलो इस बरस ..
देश की पगडंडियों का ..
रुख करते हैं !
तिरंगे को ओढ़ ...
फिर सड़कों पर ...
वन्देमातरम करते हैं!
चलो .....
कुछ नया करते हैं !
कुछ उनकी तरफ भी ...
रुख करते हैं ...
जो नोटबन्दी के बाद ....
सदमे में हैं !
देख लो ;गौर से ;कल के हुक्मरानों को ...
देखो वाकई ...
ये आज कितने भड़के हैं !
चलो कुछ नया करते हैं !
ऐसे पहलवानों को ...
परस्त करते हैं !
चलो यकीनन ..
कुछ नया करते हैं !
चलो कुछ कदम ...
देशहित में रखते हैं !
चलो कुछ नया करते हैं !
नए बरस में ..
कुछ नए जीवन रंगों से ....
दोस्ती करते हैं !
वे माँ बाप ...
जो अपने बच्चों के लिए तरसते हैं...
चलो कुछ पल ...
उनके कदमों के साथ साथ पैदल चलते हैं !
उनके थके कदमों के लिए ...
मरहम बनते हैं !
चलो कुछ नया करते हैं !
बूढी साँसों और ...
टूटते चश्मों की डोरों के ..
धागा बुनते हैं !
चलो इस बरस कुछ नया करते हैं !
कुछ अनाम बन्धनों की ...
उधारी चुकता करते हैं !
चलो नए बरस पर ... v
कुछ नया करते हैं !!

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