मैं बहती पवन तो ..
तुम मेरी शीतलता !
तुम मेरी शीतलता !
मैं अबूझ पहेली तो ...
तुम मेरी समाधान !
और
तुम मेरी समाधान !
और
मैं हताश लाचार तो ..
तुम आस और नव प्रयास !
तुम आस और नव प्रयास !
"आओ बाँध दूँ ..
वो ताबीज़ गले से ..
जो रखे सलामत तुझे ..
ज़िन्दगी की ...
हर बला से !
वो ताबीज़ गले से ..
जो रखे सलामत तुझे ..
ज़िन्दगी की ...
हर बला से !
हर तरह से !!
मुझे पता है ...
तेरी सलामती से ही -
जुड़ा है मेरा वज़ूद ..
हर तरह से !"
तेरी सलामती से ही -
जुड़ा है मेरा वज़ूद ..
हर तरह से !"
"शुभ जन्मउत्सव प्रिये !"

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