आदरणीय पीएम सर !
इस नोटबन्दी के दौर में-
मेरे पास ..
अपने स्वर्गवासी पिता के ..
पुराने सन्दूक से निकले ..
कुछ दस्तावेज और
धरोहरें मिलीं हैं !
कृपया पथप्रदर्शित करें कि-
मैं अपनी यह धरोहरें ...
कहाँ जमा करूँ ?
इस पर कोई बन्दिश तो नहीं है ; न ?
कुछ टूटे हुए चश्में की डंडियाँ ....
कुछ उधड़े हुए जूतों की निशानियां ...
एक पुराना बेंत ..
बहुत पुरानी ...
सर्दियों में पहनने वाली बंडी और -
कुछ मनीऑर्डर की रसीदें ...
मेरे पिताजी के सन्दूक से-
आज मुझे मिलीं हैं !
कहीं यह काला धन तो नहीं ?
मेरी ...
स्वर्गवासी माँ के हाथों ...
मेरे जन्म से पहले ..
मेरे लिए बुना गया ..
क्रोशिये का स्वेटर और
धूप में ..
मेरी मालिश के लिए ..
पुराने डबल बेड के ..
चादरों को जोड़ कर ..
बनाई गई ..
मेरी दरी ही ..
मेरे गुप्त खजाने की ..
अमानतें हैं !
जिन्हें मैंने ...
किसी भी बैंक में ..
घोषित नहीं किया है !
क्यों कि -
ये मेरी छुपी दौलत हैं ...
जिनमें मेरी यादें और
वादे बसते हैं !
एक बहुत बड़ा खजाना ..
और भी है ;
जिसे हासिल करने के लिए ..
नब्बे के दशक में -
मैंने अपना -
मन वचन और कर्म तक ...
गिरवी रख दिए थे !
आज भी ..
कुछ फ़टी हुई ..
आंसुओं की सोख्ता बनी चिट्ठियां ...
कुछ कसमें ...
कुछ वादे और
कुछ रुस्वाइयाँ ...
बड़े जतन से ..
सम्भाल कर रखे हुए हूँ ..
अपने ह्रदय की ..
अतल गहराईयों में !
समझ नहीं आता कि -
कहाँ जमा करूँ ...
अपनी यह बेशुमार दौलत ??
रोज़गार निर्माण के कुछ पन्ने ...
कुछ प्रवेश पत्र ...
कुछ प्रमाणपत्र और ...
कक्षा पहली से एलएलबी और
एमबीए तक की मार्कशीटें भी अक्सर ...
चिढ़ाती रहतीं हैं मुझे कि -
मैं बहुत अमीर हूँ !
पीएम सर जी ;
बस अमूमन ..
इतनी सी ही दौलत है ..
एक आम हिंदुस्तानी के -
बैंक खाते में !
कुछ मोहबतें ...
कुछ जुदाईयां ..
कुछ वफ़ाएं ..
कुछ बेरोज़गारियां ...
कुछ दर्द और कुछ रिश्ते !
अब कोई इसे -
काला धन बोले या सफेद ..
हमारे लिए यह है ;
बस ...
मन का भेद !
खुशियों की तलाश में ..
दौड़ते ..
ज़िन्दगी से रोज़ समझौता करते ...
एक आम हिंदुस्तानी से ..
क्या बटोर लेंगे ;आप ?
हाँ यदि ...
काला / सफेद का अंतर ...
स्प्ष्ट करने का ...
मन करे तो -
जो संसद में ...
इस मंथन में ...
अन्तर्नाद कर रहे हैं ...
उनकी सूची बना कर ...
प्रत्येक से ...
इतना ज़रूर पूंछियेगा कि-
२५ से ३० वर्षीय ..
राजनैतिक जीवन का ...
लेखा जोखा दें ...
जिसमें वे -
हज़ारपति से अरबपति ..
बनें हैं !
आपके इतना पूंछते ही -
वे गर्भ गृह में आकर ..
शोरगुल करके ..
सदन का बहिर्गमन ..
कर देंगे!
वह भी ..
अनिश्चितकाल के लिए !
बस ...
आप अपनी जीवटता से ..
बहिर्गमन मत करियेगा !
यकीन मानिये ..
देश आपके साथ है !
जब भागीरथ ..
नमामि गंगे को ..
पृथ्वी पर लाने के लिए ..
तप कर के ..
शिव की तपस्या ...
कर रहे थे तो -
भागीरथ के समतुल्य ..
ऋषियों ने ;
उन्हें भी -
वैसा ही कहा था ...
जैसा ये लोग ..
आपको कह रहे हैं !
नमन !
(गर्वित गौरव !)
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