Saturday, November 12, 2016

अनाम योगी कर रहा अपना काम !

मुझे नहीं पता ..
तुम कौन हो ?
बस इतना पता है कि -
किसी अनाम शक्ति ने ..
तुम्हें हिंदुस्तान के ...
भले के लिए भेजा है !

कभी लगता है कि -
तुम सरदार पटेल का
पुनर्जन्म हो ..
तो कभी लगता है कि -
कोई मायावी हो ..
जो न उत्तेजित होता है ..
न विचलित ...
न लांछित और ..
न शापित !

इतनी सारी ..
गलतफहमियों के बीच ..
इतनी सारी ..
बद्दुआओं के बीच ..
लक्ष्य को प्राप्त करना ..
कोई तुमसे सीखे !

साधारण !
नागा साधु !
न आगे कोई न पीछे !
निर्द्वन्द !
निष्कपट !
निर्भीक !
निर्लिप्त और निर्विकार !
ऐसे न जाने कितने ..
तमगे लगाने का ..
मन करता है पर ..
सोचता हूँ कि -
कोई इसे "अति" न कह दे !

खैर !
यदि महाकाल और मतंगेश्वर का आशिर्वाद रहा तो -
ऐसे ही ..
तुम्हारे लिए ...
लिखता जाऊँगा और ...
देखना एक दिन -
तुमसे जरूर भेंट होगी !

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