काश! राहुल; नितीश जैसे परिपक्कव होते और कभी कभी उचित बात पर मोदी जी का साथ भी दे लेते ; तो शायद लुप्तप्राय कांग्रेस बच जाती !
मोदी की हर बात में चापलूसी करना यदि गलत है तो फिर राहुल या विपक्ष को समर्थन देना भी तो अंधभक्ति को बढावा देना है !
वास्तविकता में कोई भी जन्मजात भाजपाई नहीं है और दस वर्षों पहले -मोदी -किसी भी प्रकार से देश की पहचान भी नहीं थे लेकिन -समय के प्रवाह में - सत्तारूढ़ कांग्रेस भारतीय मूल्यों और स्नेहपटल से दूर होती गई और सर्वश्रेष्ठ अपवाद के रूप में भाजपा का अभ्योदय होता गया और शिक्षित सवर्ण मगर बेरोज़गार उससे जुड़ता गया !
बेरोज़गारी ,आरक्षण ,भारतीयता और हिंदूवादी भावनाओं से ग्रसित जन उससे जुड़ते गए और कुछ इसके विरोधी भी होते गए !
प्रदेश स्तरीय राजनीति में ; मैं -भाजपा में कोई अतुलनीय कद नहीं पाता हूँ लेकिन उपलब्ध परिस्तिथियों में- जबकि कांग्रेस में किसी से लड़ने की क्षमता भी नहीं दिखती तो भाजपा ही उचित प्रतीत होती है !
यह भी मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि -
छोटी पार्टियों की राजनीति से हमारा प्रदेश अभी बचा हुआ है और सपा बसपा और मार्क्सवादी आदर्शवाद से अनछुआ हैं !
कतिपय आस्थाएं हो सकती हैं कि -यदा कदा विचरण करतीं हों लेकिन उनके शासन करने के मनसूबे अभी निकट भविष्य में फलीभूत होते नहीं दिखते !
गलतियां सभी में हैं !
नँगे सभी हैं !
दूध का धुला कोई भी नहीं !
ये भी नहीं और वे भी नहीं थे !
बस जिसकी गाड़ी चल निकली तो उसकी बातें भी चल निकलती हैं !
व्यक्तिगत तौर पर ;मैं किसी पार्टी का सदस्य नहीं परंतु भारतीयता के विषय पर उपलब्ध पार्टियों में मुझे भाजपा सवश्रेष्ठ लगती है !
"इंदौर से भोपाल जाना हो और
रात गहरा रही हो तो
जो भी संसाधन मिले
उससे लक्ष्य तक पहुंचना
उपयुक्त होता है ! "
कुछ ऐसा ही हाल -देश का भी -दो साल पहले था ; जब कांग्रेस को उतार कर भाजपा सत्तासीन हुई थी !
खैर ;सर जी!बहुत लम्बी दिल की बात हो गई ! आगे भी होती रहेगी !
अपनी अपनी सोच और अपने अपने तर्क !
कभी समझ का फर्क तो कभी बेडा गर्क !
सादर नमन सहित -
आपका सदैव -
गौरव !
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