Tuesday, November 22, 2016

नोटबन्दी पर राजनैतिक नक्सलवाद की मंडराती छाया !

कुछ ऐसी रफ्तार ..
हो गई है ज़िन्दगी की ..
कि न कुछ भाता है ..
और न सुहाता!

देश को -
दीमक की तरह ..
खाने वालों की सोचूं ?
उनका विरोध करूँ ?
या
अपने बच्चों ..
अपने परिवार का ..
ध्यान रखूं ?

देश की उथलपुथल ..
आहत करती है ;
एक आम भारतीय की ज़िन्दगी और
उसके सफरनामे को !

रंग भरते भारतीय को ..
बेरंग करने की ..
कुचेष्ठा करते रहते हैं ..
न जाने कितने ..
जयचंद और ब्रूटस !

किस से लड़ूं ?
किसको जवाब दूँ ?
और कैसे रोकूँ ..
अपने उद्देलित मन को ?
जो उकताहट और
अकुलाहट से ..
सोचता रहता है -
चंद्रशेखर आज़ाद बनने की!
और इन ..
देश विरोधी नामुरादों को ..
बस एक ही गोली से ...
काम तमाम करने की ..
जद्दोजहद में ...
बीत जाती है -
ज़िन्दगी की सुबह से शाम !

कब होगा मेरा भारत
इन घटिया शक्तियों से मुक्त ?
विरोध ,खिलाफत और बगावत में ..
धीरे धीरे ..
घिसट रही है -
बेचारी ज़िन्दगी !

बहुत दूर छोड़ आये ;
हम सफरनामा ...
प्यार और व्यापार का !

बस कुछ समझौतों से
गुज़र बसर चल रही है ...और
अब तो मन्दिरों के ..
देहरी पर भी ..
इन जल्लादों के ..
खात्मे की मुरादें ..
मांगी जाने लगीं हैं !

ख़ुशी इस की है कि -
इन मक्कारों के सीने में ..
ऐसी जलन मची है ..
जिसका इलाज ..
लाइलाज है !

 भ्रष्टाचारी ;
तड़पते ही रहेंगे !
ऐसी कमर तोड़ी है  ..
कि एक झटके में ..
झटक गए हैं और
मोदी की ५६ इंच छाती की
बात करने वालों की ...
खुद की कमर ..
छह इंच कम हो गई है !

तुमसे ...
कहने का मन करता है कि -
पांच सालों के लिए ..
तुमको हमने -
"छप्पन चौरंगी लेन"
से उतार कर ...
"डस्टबिन" में फेंका है ...
तो वहीँ पड़े रहो और
अपने गुज़रे ज़माने की ..
स्मृतियों की लिहाफ ओढ़े ..
समय गुज़ारो !

तुम्हारी हर कारगुज़ारियां .. 
देश प्रेम और राजधर्म ..
न हो कर ...
"राजनैतिक नक्सलवाद"
की श्रेणी में आतीं हैं और
यह देश तुम्हें ...
तुम्हारे नग्न स्वरुप में ..
देख रहा है; चुपचाप !

हम सन्तोष में हैं कि -
यह देश....
जितना अधिक ...
तुम्हें देख लेगा ...
उतना तुम्हें समझ लेगा ...
जिससे कभी ...
भविष्य में तुम्हारे प्रति ..
आसक्त न हो !

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