चकाचौंध करती रौशनी ..धोके से फूटते पटाखे ..
जख़मीं होते इंसा ..
हंसता बुज़दिल !
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
महँगी मिठाईयां और पटाखे ..
बिगड़ता महीने का बजट ..
चढ़ती उधारी ..
दिखावटी श्रृंगार ..
बारूदी वहशी गन्ध और
शोशेबाज़ी !
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
बिगड़ता महीने का बजट ..
चढ़ती उधारी ..
दिखावटी श्रृंगार ..
बारूदी वहशी गन्ध और
शोशेबाज़ी !
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
भाइयों का ..
घर में जमा होना !
"दिवाली में दीवारें" खींच बंटवारे पर विस्तृत चर्चा ...
माँ पापा के स्वास्थ्य पर- परिचर्चा कि -"बढ़ती उम्र में कितना और चल जाएंगे ?"
और
लौटने के "कन्फर्म टिकट " की जदोजहद !
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
घर में जमा होना !
"दिवाली में दीवारें" खींच बंटवारे पर विस्तृत चर्चा ...
माँ पापा के स्वास्थ्य पर- परिचर्चा कि -"बढ़ती उम्र में कितना और चल जाएंगे ?"
और
लौटने के "कन्फर्म टिकट " की जदोजहद !
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
दिवाली बाद-
फिर सूना आकाश ..
बारूदी राकेट की जगह ..
उड़ते असली हवाईजहाज़ ..
टूटते तारे ..
गाँव में अकेली पगडंडियों पर
बुजुर्ग माँ-बाप ..
उठतीं मिठाई की दुकानें ..
धुलती कढ़ाइयों - खोमचे ..
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
फिर सूना आकाश ..
बारूदी राकेट की जगह ..
उड़ते असली हवाईजहाज़ ..
टूटते तारे ..
गाँव में अकेली पगडंडियों पर
बुजुर्ग माँ-बाप ..
उठतीं मिठाई की दुकानें ..
धुलती कढ़ाइयों - खोमचे ..
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
फिर दिवाली की जगह ..
पटरियों पर दौड़ती ..
हक़ीक़त को लौटती ..
दिखावटी मगर दिलकश ज़िन्दगी ...
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
पटरियों पर दौड़ती ..
हक़ीक़त को लौटती ..
दिखावटी मगर दिलकश ज़िन्दगी ...
अकेला इंसा और सुलगते अरमा !
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