Friday, November 11, 2016

नोट सी मोहब्बत !

अब नोटों पर दिल बना कर ..
नाम लिखना ;
छोड़ दे ग़ालिब !

पता नहीं ..
मोहब्बत भी कमबख्त ..
एक हज़ारी नोट ..
की मानिंद निकले !

दिनभर साथ थी ..
रात बीती तो -
मुकर गयी !"

No comments:

Post a Comment