Monday, November 7, 2016

आखिरी रात पिता के साथ @ ७/११/१९९५

प्यारे पापा !
पता न था कि -
२१ साल पहले कि..
यह रात ;
आपके आगोश में ..
आपके साथ ...
मेरी इस ज़िन्दगी की ...
आखिरी रात थी !

अगर पता होता तो ;
ज्यादा कुछ नहीं तो ;
उस रात को ..
पूरी शिद्दत से ..
जीता और जागता ..
हर एक पल ..
आपके साथ ..
ताउम्र के लिए ..
यादें ....
बन जाने से पहले !

मेरे प्यारे पापा !
कहाँ हो आप ?
मुझे पता है ;
जहाँ हो आप !
पर ..
क्या करूँ ?
कैसे लूँ ; उस दुरी को नाप ?
जहाँ छुपे हो ; मेरे आप !

मेरे भी बाल अब ..
पकने लगे हैं ;
आँखों में भी ...
कुछ गड्ढे ..
उभरने लगे हैं ;
आपसे मिली ...
बीपी की बीमारी भी ...
धड़कने लगी है और -
बच्चे भी बड़े होने लगे हैं !
लेकिन
इतना सब होने पर भी ..
लगता है कि -
कहीं से ..
आप दिख जाओ और ...
मैं फिर से ..
छोटा सा ..
आपका दुलारा शानू बन ...
सीने से ....
चिपक जाऊं !

लेकिन अब ..
न आप हो ..
न आपकी परछाईं !
बस अगर कुछ है तो -
यादें और ..
ज़िन्दगी की वे अनमोल बातें जो कभी थीं ;
आपने बताईं !

सच !!
आज की रात ...
बड़ी मुश्किल से ...
फिर कट रही है ;
बिन आपके !!
पिछले बीस बरसों से ...
हमेशा की तरह !!

कोशिश करना कि ..
चल चित्रों की भांति ..
स्वप्नों में आकर ...
मुझे दुलार कर के ...
अंतर्ध्यान हो जाने को
मिल जाए !
फिर भगवान् की मर्ज़ी !!


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