आदरणीय स्वजन!
"इस दीपावली ...
इक नन्हा सा "दिया" ..
मेरी तरफ से भी ...
स्वीकार हो !!"
चलो प्रकाशित करें ..
'प्रकाश' से 'अन्धकार' को !
आलोकित करें 'ज्ञान' से .. 'अज्ञान' को !
और प्रज्ज्वलित करें ..
'देशप्रेम' और 'सौहार्द' को !
जहां जहां तक भी ..
स्वयं के 'अक्स' की ...
'रौशनी' जाती हो ...
वहाँ वहाँ तक ...हम साबित करें ...
अपने वज़ूद को !
रच दें ..एक ऐसा 'कथानक' ;
जो मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के ..
'श्री' चरणों जैसा हो !!
अपने कर्तव्य पथ पर ..
डटे रहें !!
ज़िन्दगी से समझौते /सौदे कर ...
न कभी झुकें ..न बिकें !!
लक्ष्य पूरे करें और लक्ष्य पूरे करने में ..
दूसरों को मदद भी करें !!
दूर कहीं ..घर में बैठे ..
पूज्य बुजुर्गों का ..
आशीर्वाद लें और ...
छोटों को अपना बहुमूल्य स्नेह दें !
बंधु !
जिसने इन रिश्तों और
अपने कर्तव्यों को निभाया ..
यकीनन उसने ..
दीपक की 'सार्थकता' को स्वीकार कर ..
स्वयं को ..
दीपक की भांति ...
परिभाषित किया !
अंत में ..
चलो इस दीपावली ...
किसी की ..
अमावस की काली रातों को ..
निजि दीयों से ..
प्रकाशित कर ..
पूर्णमासी की तरह ..
जीवन तरंगों से ..
प्रकाशित और परिभाषित करने का ..
छोटा सा जतन ...
और यत्न करें !
"जीवन को वृहद विहंगम और ब्रह्म स्वरूप में आत्मसात करने का निवेदन करता हुआ ..."
पुनः शुभकामनाओं सहित ..
सदैव आपका ..स्नेहिल
(गौरव खरे !)
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