Wednesday, July 25, 2012

जंगल का राजा कौन? हम या तुम?

मै इक शेर हूँ -
आजकल मेरी बहुत चर्चा है -
इंडियन एक्सप्रेस से लेकर दैनिक भास्कर तक....
'आज-तक' से लेकर 'दूरदर्शन' तक....
और भी न जाने कहाँ कहाँ तक.......
सारे ज़माने को मेरी बहुत चिंता है !
हो भी क्यों न?
मेरे बाप-दादों से लेकर मौसी-मौसाजिओं  तक-
सभी तो शहीद हुए है,इसी सरजमीं पे-
और पाया है-अपने प्राणों की बली देकर,
"Endangered species" का तमगा
तथा "Tiger Reserve" की जमीन का हक!
और ....
"Buffer Zone" एवम "Core Area" जैसे शब्दों का विवादित उपहार?

कितना सही है-अपनी ही जन्म-भूमि पे अपने ही अस्तित्व की लड़ाई लड़ना?
अपने ही जंगल में अपने लिए दस फुट सुकून की जमीन तलाशना?
और................
अपने आप को जंगल का राजा कहलाना?

इससे तो बेहतर होता अगर मै -
अपने आप को 'राजा' नहीं अपितु 'भईया'कहलाता?
और मेरी मौसी अथवा माँ-'बहनजी' कहलाती?
कम से कम.....
इज्ज़त और सुकून तो मिलता?

जहाँ तक पन्ना नेशनल पार्क अथवा पन्ना टाईगर रिज़र्व का सवाल है-
मेरी गुफा और घर का सवाल तो दूर की बात है-
भाई लोगों ने अपने फायदे के लिए वहां-टौरिया टेक के पास 'सराय और धर्मशाला' तक बना डाली?
कहते है कि वे 'पर्यावरण-विद ' है; और हमारे शुभ  चिन्तक हैं?
अरे! हम पे अध्ययन किया है उन्होंने और 'सराय'बना के हमें उसी सराय मे रोकेंगे?
आओ किसी दिन???
बेहतरीन पार्टी होगी और दारु-मुर्गा का मजा लेंगे???

अरे ज्यादा दूर मत जाओ-पन्ना मे ही अपना 'पेड़ पे घर' है
आओ किसी दिन-
पेड़ पे ही 'दारु-मुर्गा' के ऐश होंगे?
कभी सेवा का मौका अवश्य दे?
हम आभारी होंगे?

एक बहुत बड़े वाले हैं -उन्होने पन्ना के पास एक बड़ा 'किला'खड़ा कर दिया है-कहते हैं -'पत्थरों का घर' है-
वो मेरा -'Tented accommodation' में -"An encounter with Tiger"; करवाते हैं या दम भरते है-
अरे आप समझे नहीं-हमारा और उन होटल वालों का 'टाई अप' है....
किसी की रोजी-रोटी चलती है तो चलने दो !
आखिर हमारा क्या जाता है?
हम तो इस संसार के-
वो चलते फिरते 'expiry date' के वो फीके पकवान है
जिसका नहीं कोई कदरदान है?

अरे ! कभी मेरी जंगल  की गुफा में सो के देखो?
पत्थरों के  गढ़  की बात करते हो????
मुझे कौन बतायेगा?
जब मेरी एक गुफा ही नहीं तो फिर तुम्हारी -सराय कैसे?
जब मेरा एक पहाड़ ही नहीं तो फिर तुम्हारा पूरा पाषाण गढ़ कैसे?
कौन देगा जवाब???



"Please do not disturb!We are sleeping!"

No comments:

Post a Comment