
'सत्य'-हताश,निराश और परेशान है, परन्तु पराजित नहीं !
ऐसा क्यूँ होता है कि- जब जब 'सत्य' अपने अस्तित्व के बात करता है ;
'असत्य' के बादल 'सत्य' को दबाने की कोशिश करते हैं?
अपने कुतर्कों को तर्क का जामा पहना कर कैसे 'असत्य' के महान योद्धा-
अपने आपको 'शहीद' साबित करने को उत्तावले रहते हैं?
हो सकता है कि 'अन्ना हजारे' और 'बाबा रामदेव' के कुछ राजनैतिक एजेंडे हों?
पर उस सब से परे बात तो वे सच्चाई की कर रहे हैं ?
गंगा को सारी दुनिया धरती पे लाना चाहती थी;
पर कोई इस काम के लिए 'भागीरथ' बनाना नहीं चाहता था?
पर जब .....
'भागीरथ' ने गंगा माँ को 'पृथ्वी' पे लाने के लिए तप प्रारंभ किया तो-
बहुत से मुनियों ने कहा कि -ये पागलपन है,उतवलापन है और मुर्खता है?
क्या कभी 'गंगा' को आसमान से धरती पे आते देखा है?ऐसा हो सकता है?
यह बेतुका है और कोई और कारण से मुनि भागीरथ माँ गंगा को पृथ्वी पे ला रहें हैं और
देखना कोई छुपा हुआ एजेंडा होगा?
पर......
मुनि भागीरथ ने बिना विचलित हुए तप जारी रखा और-
इतिहास गवाह है -माता गंगा शिव जी की जटाओं से पृथ्वी पे आयीं !
अब.....युग बदला - समय बदला
मनुष्यता बदली उसकी फितरत बदली .....
कहाँ मुनि 'भागीरथ' और कहाँ मुनि 'दधीचि'?
कहाँ 'बापू' और कहाँ 'सुभाष' ?
पर.....
चलो कुछ तो बात सुने उनकी जो अपने 'आदर्शों' को जिन्दा रखने की कोशिश कर रहें है?
'सत्य' के अंतिम लड़ाई के 'सिपहसलार' है?
और ....
'सत्य' के उस अंतिम 'दीये की अंतिम 'बाती' में अपनी 'जीवटता' का तेल डाल रहें है
और ......
कोशिश में लगे हैं कि-
'सत्य' अपराजित रहे !
'सत्य' शाश्वत रहे!
'सत्य' चिरंतर रहे!
'सत्य' सत्य रहे!
जरा सोचिये -
भला गरुड़ के पंखों को काट कर उसकी उड़ान को रोकने वाले हम कौन होतें हैं ?
सूरज की तपती जीवनदायनी आंच को रोकने वाले हम कौन होतें हैं?
अगर हम कुछ नहीं तो फिर .......
इतिहास इसका फैसला करेगा!
समय इसका फैसला करेगा!
प्रकृति इसका फैसला करेगी !
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