
क्यूँ भूलता जा रहा हूँ -
दीवाल पे टंगी उन अपनों की तस्वीरों को-
जिन्होने एक ज़िन्दगी गुजारी हमारे साथ?
जो हमें इस दुनिया में लेकर आये -
संघर्ष कर के, हमें बड़ा और होनहार बनाया!
और.....
अपने बहुत कुछ सुनहरे सपनों और ख्वाबों को त्याग कर
हमारे सपनों को हकीकत बनाया !
क्यूँ भूलता जा रहा हूँ -
उनको- जिनकी फोटो पे हर बरस दीवाली पे;माला बदलना अब भारी लगने लगा है ?
जिनकी फोटो और यादों पे जमी धूल को साफ़ करना अब पुरानी आदत हो गई है?
और अब उनके चित्र के सामने दीया और अगरबत्ती लगाना औपचारिकता बन कर रह गई है?
और....
उनके सामने जा के उनसे मन की मुराद मांगना तो बीते दिनों की बात हो चुकी है ?
और और....
न जाने कब से उनकी याद में,उनके प्यार में,उनके दुलार में और बिछोह में मेरी आँखों में आँसूं नहीं झिलमिलाये?
पता नहीं क्यों?
न जाने क्यों???
भूलने की आदत तो देखिये-
-भूल गया घर के उस पहले 'ब्लैक एंड वाईट' टी.वी.को जो कभी प्यारे पापाजी बड़े जतन से अपने बच्चों के लिए लाये थे!
-भूल गया उस फिलिप्स के रेडियो-टेप- रेकॉर्डर 'टू -इन वन ' को;जो कभी पापा हमें गाना सुनाने को लाये थे!
-भूल गया उस टूटी हुई 'रेवोल्विंग चेएर' को जिसपे बैठ के पूज्य पापा ने जीवन की 'ऊँच-नीच' अपने बेटों को सिखाई-पढाई थी!
भूल गया अलमारी के उन 'हैंगरों' को जिनपे कभी पापा की शर्ट्स-पैंट टंगती थी!
जीवन की आप-धापी में भूल गया सब कुछ पर....
नहीं भूला सिर्फ अपने माँ -पापा को-
उनके जज्बे को,उनके संघर्ष को और उनके जतन को -
जिसके कारण आज मेरा अस्तित्व है वर्ना ....
मेरा क्या होता ?
आओ याद करें उन्हें जिन्हें हम धीरे धीरे भूलते जा रहे हैं !
हाँ !हम व्यस्त हैं -हम भी अपने बच्चे पाल रहें हैं ,पर इसका मतलब यह तो नहीं कि-
-हम अपनी जड़ों को बिसरा दें?
-हम अपनी उर्वरा शक्ती को भूल जायें ?
-हम अपनी दुआओं को भूल जाएँ?
-हम अपनी छाया को भूल जाएँ जिसकी ठंडक और उस छाँव को बिसरा दें जिसने
-अपने दामन और आँचल में हमें पाला और इस लायक बनाया कि
आज हम हैं!

Papa I Love you.....
ReplyDeletePapa I Miss you.....
Papa I feel you......
My loving Papa........
My Darling papa...........