Wednesday, August 15, 2012

मेरा जीवट अभी जिंदा है !



  • तुम्हारे जाने के बाद-
धीरे धीरे बदलता जा रहा है ज़िन्दगी का रास्ता ......
सीधी सपाट सड़के तब्दील हो गई हैं पथरीली पगडण्डीईयों मे
और ......
दुनिया बदल सी गई है !

  • जानती हो ....
-जिन बेटों के लिए तुम मुझ से लड़ जातीं थी आज वो 'हमारी आँखों के तारे' अपनी बीवीओं के लिए मुझ से लड़ जाते हैं ...
-रात को जब जीवन की 'पचत्तर दोपहरियाँ' देख के कभी शरीर मे दर्द से कराह निकल जाती है तो पोरों में आंसूं आ जाते हैं क्यों की-
-तुम बहुत दूर चली गई हो और तुम्हारे संस्कारित बेटों के लिए मै बहुत दूर चला गया हूँ !
काश!कोई पलट के आता और मेरे 'सिर पर हाथ फेर के कहता-'बाबूजी' पैर दबा दै और मेरे न कहने पर भी तुम्हारे दो बेटे मेरे दो पैर और दो बेटे मेरे दो हाथ दबाते?
पर....
अब ऐसा नहीं है!

  • तुम्हारे जाने के बाद.....
-कोई नहीं धोता मेरे कपडे और चड्डी-बनियान!
-कोई नहीं ठीक करवाता मेरा फटा हुआ पैंट या उधड़ी हुई सिलाई या चश्मे की वो टूटी हुई डंडी जिसके बिन पिछले एक महीने से डोर बाँध के मै काम चला रहा हूँ !
-कोई नहीं लाता अपने बाबूजी की "बी.पी" की गोली;बल्कि तुम्हें याद होगा कि -बचपन में अपने इन बच्चों को पालने के लिए हम दोनों रात-रात भर जगा करते थे !
-कोई नहीं देता रात बारह बजे चाय की इक प्याली यदि मेरा मन कर जाये और संकोच लगता है मांगने मे अपने ही घर मे!
-कोई नहीं भरता इक बाल्टी पानी शौच के लिए क्यों कि-तुम्हारे बेटों को अब मेरे घुटनों का दर्द नहीं दीखता और
-कोई नहीं देता अपनी उंगलियो का सहारा जब मै लडखडाता हुआ सीढ़ी उतरता हूँ!
और बरबस लगता है कि-कहाँ कमी रह गई हमारी परवरिश और प्यार मे जो-
अपना ही पिता अपने ही बच्चों के बीच बेगाना हो गया है?
-"शायद कमी मेरी ही रही होगी वर्ना तुम्हारी परवरिश मे तो कमी हो नहीं सकती?"
  • अभी कुछ दिनों पहले तुम्हारी छोटी बेटी के यहाँ चौक में जाना पड़ा था और मेरे पास कपडे नहीं थे;अपनी 'पेंसन' की मदद से मैंने नए कपडे सिलवा लिए थे!पर तुम्हारे होनहारों को कभी अपने पिता के कपडे नहीं दिखते और दिखें भी क्यों?क्योंकि अब में वैसे भी 'एक्सपायरी डेट';का वो " चुका हुआ पिता हूँ" जिससे तुम्हारे बेटों को कोई खास फ़ायदा होने से रहा?
  • शायद तुम्हें न मालूम हो कि आज कल तुम्हारे बेटे कुछ ज्यादा ही "मेहनती और बिजनेस" वाले हो गए हैं और-"बीघा ,एकड़,आरे,स्टाम्प,इकरारनामा,शपथ-पत्र और एग्रीमेंट" जैसे बड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हैं पर बाबूजी फल खा लीजिए,सर दबा दें या चिंता न करो सब ठीक हो जायगा जैसे शब्द तुम्हारे जाने के बाद बस यादों में ही रह गए हैं!शायद वे उस इश्वर प्रदत इकरारनामे को भूल गए हैं जिसमे मै उनका पिता हूँ और वे मेरे बेटे!चलो तुम्हे ये जान कर खुशी होगी कि-तुम्हारे जाने के बाद भी तुम्हारे बेटे तुम्हें याद कर के अगरबत्ती लगा लेते हैं और चाय का कप तुम्हें चढ़ा देते हैं पर चलो देखते हैं मुझ से इस जन्म में कैसा सलूक करते हैं?
  • बहुत ऊँची ऊँची जज्बातों की बातें करने वाले तुम्हारे बेटे ... हो गए हैं बहुत खोकले ...और कभी कभी मुझे फिकरे भी कसने लगे हैं!बिचारे सोचतें हैं कि-बाबूजी ऊँचा सुनतें हैं और उन्हें कुछ भी कहने से फर्क नहीं पड़ता!"साठया गए हैं ,दिमाग ख़राब हो गया है,बहुत परेशान करे हैं -क्या करें,बाबूजी अति करें हैं और दिमाग ख़राब है";जैसे जुमले अपने बच्चे अब सुनाते हैं और मै अपमान का घूँट पी कर सह लेता हूँ और वे सोचतें हैं कि -बहरे को सुनाई नहीं देता?
और ...
  • अपनों के बीच मै ऐसे घिरा हूँ जैसे-
-भीष्म पितामह तीरों की सेज पे!
-या शाहजहाँ औरंग्ज़ेबों के चंगुल मे!

  • पर तुम चिंता मत करना...
-मेरी पेन्शन मुझे मिलती है पर...
-हाँ! बैंक मे लाइन मे खड़े होने मे थोड़ी दिक्कत जरूर होती है !
-पिछली बार तो बैंक मे चक्कर आ गया था पर..
-कुछ लोगों ने मेरी मदद कर दी थी और घर पंहुचा दिया था !
-पर उन घर पहुचाने वालों में कोई तुम्हारा बेटा नहीं था?

-बस तुम चिंता मत करना ....
मेरा आत्म-सम्मान अभी जिंदा है!
मेरा आत्मा-बल अभी जिंदा है!
मेरा जीवट अभी जिंदा है !





1 comment:

  1. Dedicated to those old age people who are suffering becoz of their children's ill-treatment!Let's say 'Sorry' to our Parents ;who brought us up to this level in our lives & we are neglecting them because of non logical reasons!

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