

६५ साल पहले -
आओ नमन करें उस गरम खून को जो बहा देश को आज़ाद करानें में!
आओ नमन करें उन गरम विचारों को जिन्होनें प्रज्वल्लित की देश प्रेम की चिंगारी!
आओ नमन करें उन गरम चीखों को जो बदल गई करुण क्रंदन मे अपनों को खोने के बाद देश की बलिवेदी पे!
आओ नमन करें उन गरम जख्मों को जो भर नहीं पाए,अपनों को खोने के बाद!
६५ साल पहले -
आओ नमन करें उस नरम इंसान को जिसका नाम 'बापू' था!
आओ नमन करें बापू के उस नरम अंदाज़ को जिसने अंग्रेज़ी हुकूमत की चूलें हिला दीं थी!
आओ नमन करें उस 'नरम दल' को जिसने ब्रिटिश सल्तनत को हिन्दुस्तान छोड़ने को मजबूर कर दिया था!
आओ नमन करें उन नरम माओं को जिन्होंने पोषित किये वो सुपूत जिन्होंने असहयोग आन्दोलन में गाँधी जी का साथ दिया!
६५ साल पहले -
आओ नमन करें उन सुहागिनों की टूटी चूड़ियों को जो टुकड़ों में बाँट गई अपनों को खो कर!
आओ नमन करें उन सूनी कलाइयों को जो सूनी ही रह गई देश के खातिर!
आओ नमन करें उन सूखी आँखों को जो पथरा गई अपने बेटों की बाट जोहते जोहते !
आओ नमन करें अधूरी ख्वाइशों को जो दफ़न हो गई देश की मिट्टी में!
सलाम उस जज्बे को!
सलाम उस सदमे को!
सलाम उस लम्हे को!
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