शायद इसी लिए फौज में अफसर बनने से पहले 'साइकोलिजिकल टेस्ट' होता है जिसने व्यक्ति के मानव मन चित्त और चिंतन के साथ मनोबल को देखा जाता है ! यह भी देखा जाता है कि -'राष्ट्रसेवा में कालान्तर में यह टूट तो नहीं जाएगा ?"
कुछ ऐसा ही टेस्ट 'आईएएस' में भी लागू करना चाहिए !
उन्होंने जो किया उससे उन्हें खुदा मिला हो या न मिला हो परन्तु उनके परिवार को अवश्य कभी न भरने वाला जख्म वे दे गए ! एक अभिशप्त पत्नी और पुत्री सदा डबडबाई आँखों से उस माला चढ़ी फोटो को निहारा करेंगे जिसे वे दोनों 'पति और पिता' कह कर ताउम्र पूजेंगे !
मुकेश पांडेय जी चले गए !
जाना सभी को है !
"कोमा फुलस्टॉप के बाद शून्य में तो सभी को विलीन हो जाना है !" जैसे आध्यात्मिक बातों के साथ ज़िन्दगी जीने में मज़ा है मगर आध्यात्म से मोक्ष और परम् ब्रह्म के ज्ञान की खोज में 'आत्महत्या' बेसिरपैर की बात है !!
खैर ...
"एक अच्छे इंसान का बुरा फैसला !
एक आईएएस का घटिया फैसला !
एक पिता का पितृत्व से परे फैसला और
एक पति का बहुत ही प्रलयकारी फैसला !!
"परेशां तो सभी हैं लेकिन उसका सबब मौत नहीं !!"
नमन उनकी आत्मा को !
ईश्वर साहस दे उस परिवार को जिसे श्री पांडेय बेमौत मार गए !
मुझे विश्वास है कि -उनकी पत्नी इस सदमे से उबर कर साबित करेंगी अपना वज़ूद !
'बुन्देली धमाका!'(गर्जना स्वाभिमान और आत्मबल की!) BUNDELI DHAMAKA...' समूचे बुंदेलखंड को एक मुखर मंच प्रदान करने का अभिनव प्रयास है 'बुन्देली धमाका' !हर चीज जिसका सम्बन्ध सुख-दुःख से हो अथवा भ्रष्टाचार-शिष्टाचार से हो या विकास-पतन से हो- यह ब्लॉग- महाराजा छत्रसाल की तलवार की भांति अपने उद्देश्य को पूरा करेगा!बुन्देली रिश्तों और उसकी सोच को नई परिभाषाओं मे बदलने का प्रयास करेगा यह मंच!पर्यटन और उसका आर्थिक प्रगति में योगदान सहित राजनीति तथा कूट नीति के असर पे भी हम बात करेंगे!!
Friday, August 11, 2017
शांति की खोज में .. एक आईएएस की आत्महत्या !
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