Thursday, April 21, 2016

अगर!

अगर...
तेरे नाम में....
जुड़ जाता...
मेरा नाम...
मेरी ख्वाइशों को भी.. 
मिल जाता.
इक मुकाम!

तेरे आँचल को...
ढंकने का...
न लगता इलज़ाम...
अगर...
मेरी शामों में....
खो जाती..
तेरी हर इक शाम!

तेरे माथे की ...
उड़ती सिमटती... घटाओं को...
सहेजने को...
बढ़ जाते...
मेरे हाँथ...
अगर...
मेरी ख्वाइशों को....
मिल जाता...
तेरा इक हाँथ !

तेरे जज्बातों को भी...
मिल जाती...
मेरी जुबां....
अगर ;
मेरी ख्वाइशों को.....
मिल जाता...
इक तेरे जैसा -
हम नुमा !

तेरे गिरते...
अश्कों को भी...
मिल जाता...
इक आंसू पोंछती....
 हथेली का किनारा....
अगर.
मेरी ख्वाइशों को...
मिल जाता...
इक तेरा सहारा!

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